kanaha

कविता : मन तेरे क्या आए

ककोड़े दो सौ के पाव हो गए, नहीं जिनका कोई भाव । कान्हा हमरे अब तो जन्म ले, रख हमसे जरा लगाव । ‘ अजस्र ‘ आस्था क्योंकर बिकती, तुच्छ स्वार्थों मोल । ईद, दिवाली, क्रिसमस और बैसाखी, ऐसा कौन… Read More

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कविता : क्यों हो रहा

तेरे मुस्कराने का मुझको न जाने क्यों आभास होता है। तेरी तस्वीर बनाने का मेरा दिल क्यों कहता है। न हमने तुमको देखा है न तुमने हमको देखा है। फिर भी तुमसे मिलने को मेरा दिल क्यों कहता है।। पलक… Read More

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कविता : हिम्मत

न देखो तुम अब मुझको कुछ इस तरह से। मुझे कुछ भी नहीं होता तेरे अब देखने से। बड़ी मुश्किल से संभाली हूँ तुम्हारी उस बेवफाई से। मुझे जी कर दिखाना है तुम्हारे उस दुनियां को।। मेरा जीना तेरी हार… Read More

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कविता : मोहब्बत की ज्योत

बना है मौसम कुछ ऐसा की दिल खिल उठा है। नजरा देखो बाग का कैसे फूल खिल रहे है। जिन्हें देख कर हमारी मोहब्बत मचल उठी है। और उनकी यादों में खोकर तड़पने हम जो लगे है।। बनाया था इसी… Read More

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कविता : हिंदी

क्यों हिंदी हिंदी करते हो, हिंदी का दम क्यों भरते हो, है तो बस एक भाषा ही, क्यों घमंड इसका करते हो। अस्तित्व है ये सिर्फ़ भाषा नही, प्रगति की है अब आशा यही, है जन जन को ये जोड़ती,… Read More

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कविता : फिर रात

सत्य एक, बीती दो रात है ये दो चांदनी, फिर कहे कोई बात है रूको नहीं, झुकों नहीं दिन भी है, फिर रात है। दिशा प्रशस्त हो चुकी कदम – कदम पे कलम धार है जो रूके नहीं चलते चले… Read More

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कविता : पूर्वजन्म की यादें

मेरे मुस्कराने का तुझे भला क्यों इंतजार है। तेरे आँखो में क्या मेरे लिए प्यार है। तभी तो तुम मुझे हमेशा खोजते हो। पर अपने दिलकी बातें क्यों कह नहीं रहे हो।। तेरे मुस्कराने का मुझे सदा एहसास होता है।… Read More

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कविता : राखी चाँद तक पहुंच गई

पृथ्वी ने भेजी है राखी, चंदा तक पहुंचाने को। विक्रम-प्रज्ञान हैं बने संवदिया, भाई-राखी बंधवाने को । राखी में भरकर है भेजा, आठ-अरब का प्यारा- प्यार । इसरो ने उसको पहुँचाया , सोलह-बरस ,मेहनत का सार । भारत संग जहान… Read More

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कविता : शिक्षक होना आसान नहीं है

शिक्षक होना आसान नहीं है, चरित्र होता निर्माण यहीं है, कांटों को भी फूल बना दे, मेहनत है वरदान नहीं है। अनुशासन में सीमित रहकर, बातें कुछ आंखों से कहकर, प्रेरणा का स्रोत है बनते, स्वयं की इच्छा को ना… Read More