प्यार को प्यार से जाने तो, कोई बात होती है। दिल को दिल से जानो तो, कोई बात होती है। मैं कैसे समझूँ की तू, मुझको चाहती है। कुछ तो दे दो इशारा तुम, अपनी आँखों से।। जब भी देखता… Read More
प्यार को प्यार से जाने तो, कोई बात होती है। दिल को दिल से जानो तो, कोई बात होती है। मैं कैसे समझूँ की तू, मुझको चाहती है। कुछ तो दे दो इशारा तुम, अपनी आँखों से।। जब भी देखता… Read More
विद्यासागर की वाणी सुनो। ज्ञान अमृत का रसपान करो। ज्ञानसागर दिव्य ध्वनि सुनो। जैन धर्म का पालन करो। विद्यासागर की वाणी सुनो।। आज हम सबका यह पुण्य है। मिला है हमें मनुष्य जन्म। किये पूर्व में अच्छे कर्म। इसलिए मिला… Read More
कुछ तो बात है उनमें, तभी लोग उनके हो जाते है। अपने अपने प्यार का इजहार करने, गुलाब का फूल लेकर, बार बार सामने जाते है। भले ही कुछ बोल न सके, पर अपनी बात गुलाब दिखकर समझते है। और… Read More
हँसता हुआ चेहरा, प्यारा लगता है। तेरा मुझे देखना, अच्छा लगता है। घायल कर देती है तेरी आँखे और मुस्कान। जिसके कारण पूरा दिन, सुहाना लगता है।। जिस दिन दिखे न तेरी एक झलक। तो मन उदास सा, हो जाता… Read More
“नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू ही सही नहीं विसाल मयस्सर तो आरजू ही सही “ जी नहीं ये किसी हारे या हताश राजनैतिक पार्टी के कार्यकर्ता की पीड़ा या उन्माद नहीं है। बल्कि हाल के दिनों में तीन सौ… Read More
वह किसी नन्ही सी गुड़िया के लिए सुकून का ठिकाना, वह किसी निराश सर के लिए मजबूत कंधे का बहाना, वह किसी बच्चे को दौड़ते हुए समय से स्कूल पहुंचाना, वह किसी बूढ़ी माँ के रोगों का एकमात्र दवाखाना, वह… Read More
हाल ही में एक ट्वीट ने काफी सुर्खियां बटोरी , “पूत कपूत तो क्यों धन संचय पूत सपूत तो क्यों धन संचय” जिसमें अमिताभ बच्चन साहब ने सन्तान के लिये धन एकत्र ना करने का स दिया उपदेश दिया है… Read More
क्या था बचपन याद आ रहे है हमें, वो बचपन के दिन। जिसमे न कोई चिंता, और न ही कोई गम। जब जैसा जहां मिला, खा पीर हो गए मस्त। न कोई जाति का झंझट, न कोई ऊंच नीच का… Read More
आज छायावाद के प्रवर्तक कवि, लेखक, निबंधकार, उपन्यासकार जयशंकर प्रसाद की पुण्यतिथि है। दिनांक 15 नवम्बर 1937 हिन्दी के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तम्भों में से एक इस कवि का दुनिया से प्रस्थान हो गया था। उन्होंने हिन्दी काव्य… Read More
कच्चे हैं हम, मगर सच्चे हैं हम, प्यारे-प्यारे छोटे बच्चे हैं हम…2 गुलशन में कितने ही रंग से खिले, माला में गुंथे बड़े अच्छे हैं हम। कच्चे हैं हम मगर सच्चे हैं हम। भारत की हम शान बनें, मान और… Read More