जिंदगी है महंगी , और मौत क्यों हो गई सस्ती….?? हाय रे…….!! ये कैसी अनजान मस्ती । छोटी-छोटी सतही बातों पर, क्यों हो रही है जीवन की केवल पस्ती और पस्ती (हार)? जीवन में कभी क्या कोई हार न होगी… Read More
जिंदगी है महंगी , और मौत क्यों हो गई सस्ती….?? हाय रे…….!! ये कैसी अनजान मस्ती । छोटी-छोटी सतही बातों पर, क्यों हो रही है जीवन की केवल पस्ती और पस्ती (हार)? जीवन में कभी क्या कोई हार न होगी… Read More
‘स्त्री परिधि के बाहर’ उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपद सोनभद्र की रहने वाली डॉ. संगीता की 2021 में प्रकाशित आलोचनात्मक पुस्तक है। इस पुस्तक में उन्होंने हिंदी साहित्य में स्त्री आत्मकथा का विवेचन व विश्लेषण किया है तथा हिंदी साहित्य… Read More
बचपन खोकर आई जवानी, साथ में लाई रंग अनेक। दिलको दिलसे मिलाने को, देखो आ गई ये जवानी। अंग-अंग अब मेरा फाड़कता, आता जब सावन का महीना। नए-नए जोड़ों को देखकर, मेरा भी दिल खिल उठता।। अंदर की इंद्रियों पर… Read More
जिंदगी का हिसाब किताब यही देना पड़ेगा। जीवन का कर्ज तुम्हें यही चुकाना पड़ेगा। जिंदगी का हिसाब किताब यही देना पड़ेगा। चाहे कितने भी छुपा लो पापों को। जिंदगी का हिसाब किताब यही देना पड़ेगा।। जिंदगी अब बोझ बनकर रह… Read More
बचपन खोकर आई जवानी, साथ में लाई रंग अनेक दिलको दिलसे मिलाने को, देखो आ गई अब ये जवानी अंग-अंग अब मेरा फाड़कता, आता जब सावन का महीना नए-नए जोड़ों को देखकर, मेरा भी दिल खिल उठता। अंदर की इंद्रियों… Read More
बहुत दिनों से मेरी फड़क रही थी आँखे। कोई शुभ संदेश अब शायद मिलने वाला है। फिर एकका एक तुम्हें आज यहाँ पर देखकर। अचंभित हो गया मैं तुम्हें सामने देखकर।। रुलाया है बहुतो को जवानी के दिनों में। कुछ… Read More
मैं शाम के वक्त चौराहे पर आंखे सेंकने और तफरीह के लिये निकला था। कि मुझे आंखे सेंकने के पुराने अनुभवी उस्ताद अच्छे लाल जी मिल गए , जो कि अब” अच्छे वाले सर” के नाम से विख्यात हैं। मुझसे… Read More
मेरा मेहबूब आया है जन्नत के इस बाग में। जिसे सजाया है वसुन्धरा ने चाँद और सितारों से । धरा ने भी बिछा दी है सफेद चादर मोतीयों की। और महका के रख दिया है रातरानी ने इस बाग को।।… Read More
दिया है जो तोफा तुमने जिसे बता नहीं सकते। और अपनी खुशी को हम छुपा भी नहीं सकते। मना जो उसने किया है इसे बताने के लिए। करें तो क्या करें अब हम बना रहे दोनों का संतुलन।। बड़े आदर… Read More
सावन के मास में वो, शिवजी पर जल ढारत है। बेल पत्ती और फूलों से, पूजा नित्यदिन करती हैं। मनोकामना पूरी कर दो, सावन के इस महीने में। मिलवा दो प्रभु अब मुझे, उस जीवन साथी से। जिसके सपने देख… Read More