kate

जिंदगी का हिसाब किताब
यही देना पड़ेगा।
जीवन का कर्ज तुम्हें
यही चुकाना पड़ेगा।
जिंदगी का हिसाब किताब
यही देना पड़ेगा।
चाहे कितने भी
छुपा लो पापों को।
जिंदगी का हिसाब किताब
यही देना पड़ेगा।।

जिंदगी अब बोझ
बनकर रह गई।
जिंदगी अब बोझ
बनकर रह गई।
झूठ और लूट की
हदे सब पार की।
झूठ और लूट की
हदे सब पार की।
चाहे कितने भी
छुपा लो पापों को।
जिंदगी का हिसाब किताब
यही देना पड़ेगा।।

मानव की ललाच का
कोई अंत नहीं।
संतुष्टि जीवन में
कभी होनी ही नहीं।
देने वाला देता रहता
ये सोच कर।
शायद उस का ये
आखिर सौदा हो।
चाहे कितने भी
छुपा लो पापों को।
जिंदगी का हिसाब किताब
यही देना पड़ेगा।।

धर्म से तू कभी
जोड़ा ही नहीं।
पैसे के चक्कर में
तू पड़ा रहा।
याद कर तो उस
सिकंदर को जरा।
जिसने दौलत के लिए
क्या क्या किया।
जब वो शिवपुर गया तो
हाथ खाली था।
सारा खजाना उसका
यही पर रहा गया।
चाहे कितने भी
छुपा लो पापो को।
जिंदगी का हिसाब किताब
यही देना पड़ेगा।
जीवन का कर्ज तुम्हें
यही चुकाना पड़ेगा।।

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