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amaa

कहानी : चल, भाग यहाँ से

“चल, भाग यहां से “ जैसे ही उसने सुना ,वो अपनी जगह से थोड़ी दूर खिसक गयी।वहीं से उसने इस बात पर गौर किया कि भंडारा खत्म हो चुका था। बचा -खुचा सामान भंडार गृह में रखा जा चुका था… Read More

akela pn

कविता : गम में डूब गया हूँ

दुनिया को खुश रखते-रखते ख़ुद ही गम में डूब गया हूँ स्वार्थ भरी दुनियादारी से मैं अब मन से ऊब गया हूँ इतना भी आसान नहीं है हँसना और हँसाते रहना भीतर-भीतर टूटते रहना बाहर से मुस्काते रहना घर-परिवार-समाज है… Read More

lover zone

कविता : इश्क हुआ तो..

न दिल मेरा लगता है न मन मेरा लगता है। हुआ है जब से इश्क सब बेकार लगता है। इसलिए तो इश्क एक बहुत बड़ा रोग होता है। जिसे लग जाये वो सदा बीमार रहता है।। जमाने में हमने बहुत… Read More

mehbub

कविता : करीब होकर दूर है

हम जिन्हें चाहते है वो अक्सर हमसे दूर होते है। जिंदगी याद करें उन्हें जब वो हकीकत में करीब होते है।। मोहब्बत कितनी रंगीन है अपनी आँखो से देखिये। मोहब्बत कितनी संगीन है खुद साथ रहकर के देखिये।। है कोई… Read More

asihrwad

कविता : सब मिलेगा

बहुत पावन और पवित्र दिन आज कल चल रहे है। कही श्रीगणेशजी का जयकारा तो कही पर्यूषण महापर्व राज। चारों तरफ का वातावरण है बहुत ही भक्तिमय। जो देखते ही ह्रदय में धर्म ज्योत को जला रहा है।। तेरे द्वार… Read More

janamdin

कविता : शुभ जन्मदिन

जन्मदिन शुभ हो तुमको आज । खुशियां सजी रहे दिन रात । साथी स्वजन सब मिल गाएं । सदियों दीप ‘ अजस्र ‘ जलाएं । देते भर-भर आशीर्वाद । जन्म दिन शुभ हो तुमको आज । खुशियां सजी रहे दिन… Read More

women in ghughat

ग़ज़ल : ये बहर- बहरे-रमल की मुज़ाहिफ़ शक्ल है

बस हॅंसी हैं वो तो होने दो नज़र में मेरे नइं। यूॅं किसी से झूठ कह दूॅं ये हुनर में मेरे नइं।। तुम कहीं अपना चलाओ जाके जादू हुस्न का। औरों को होगी ज़रूरत तेरी घर में मेरे नइं।। ज़िंदगी… Read More

krishan pram

गीत : नैनो का मिलन

मोहब्बत में अक्सर लोग, सब कुछ भूल जाते है। दिल दिमाग में उसके, मोहब्बत छाई रहती है। न कुछ कहता न सुनता, बस अपने में मस्त रहता। और प्यार के सागर में, वो डूब जाता है।। नैन से नैन लड़ा… Read More

radha love

कविता : अपनी अपनी सोच

तेरे मेरे दिलके रिश्ते सच में बहुत गैहरे है। इसलिए हर धड़कन में तुम जो बसते हो। देख न ले जब तक तेरी सूरत को हम। तब तक दिन अधूरा अधूरा सा लगता है।। मिले हो जिस तरह से तुम… Read More

leaf

कविता : कौन जो …..??

कौन जो आवाज़ देता, बादलों की ओट से । भय से मन थर-थर हुआ है, बिजलियों की चोट से । बूंदों की लड़ियां , ये जैसे, विष में बुझे बाण हैं । छिल रहा यह मन तो मेरा, जो कब… Read More