(१ ) दीपक की तरह खुद जल गये, धुंआ ही नैनों का श्रृंगार बना। खुद जल रौशन हमें किया, बदले में हमसे कुछ भी न लिया !! दिनांक ज्ञात नहीं कब लिखा था ? (वर्ष -२००२ ) (२) मिल रहे… Read More
(१ ) दीपक की तरह खुद जल गये, धुंआ ही नैनों का श्रृंगार बना। खुद जल रौशन हमें किया, बदले में हमसे कुछ भी न लिया !! दिनांक ज्ञात नहीं कब लिखा था ? (वर्ष -२००२ ) (२) मिल रहे… Read More
आज हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में पूरा सोशल मीडिया हिंदी के बखान अथवा हिंदी की खामियों से पटा पङा है। हिंदी दिवस हम प्रतिवर्ष 14 सितंबर मनाते हैं, क्योंकि 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राज-भाषा घोषित किया। यह तारीख… Read More
एक राष्ट्र, एक भाषा किसी भी देश को एकता के सूत्र में मजबूती से बांधने का काम करती है। वह उस देश के लिए आन, बान और शान होती है। इससे किसी भी देश की सभ्यता और संस्कृति का भी… Read More
हिन्दी दिवस समारोहनागरी प्रचारिणी सभा देवरिया में प्रति वर्ष की भांति हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में बुद्धिजीविओं, साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों ने सहभागिता की।समारोह को मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार डॉ. अरुणेश नीरन, विशिष्ट अतिथि… Read More
हिंदी में अजब घटतौली है। कमोवेश हर जगह। क्या प्रकाशक, क्या संपादक, क्या अखबार या पत्रिकाएं। सब के सब एक लेखक नाम के प्राणी को गरीब की जोरु को भौजाई बनाने का सुख लूट रहे हैं। जाने कब से। पहले… Read More
हिंदी भाषा का 1000 वर्ष का हमारा ये गौरव शाली ईतिहास हमें यह बताता हैं की मेरी जड़े इतनी कमजोर नही हैं की जो भी आएगा मुझे उखाड़ कर फेक सकेगा | बल्कि मुझ मे इतना प्रेम, स्नेह भरा हैं… Read More
सतना की माटी ने सतना ही नहीं बल्कि देश विदेश में अपने सपूतों को उजागर किया। इस माटी में कई बीज अंकुरित होकर अपने काम के द्वारा इस जग में नाम कर गए, उसी में एक जाना पहचाना नाम था… Read More
अथ श्री चौबे बाबा की यस से नो तक की ‘इंजीनियरिंग कथा’ फलां चच्चा को देख ले इंजीनियरिंग किए हैं, आज मौज काट रहा है अगला। कुछ साल का मेहनत है उसके बाद तो जिंदगी मजे में कटेगा। ये घनश्याम… Read More
बृहदारण्यक उपनिषद् के अनुसार पुरुष जैसा आचरण करता है वैसा ही होता है। सदाचारी या पापी की व्यवस्था सदाचार एवं पापाचार के अधीन है। पुण्य-कर्म से पुण्य एवं पाप कर्म से पाप कहा जाता है। जो कर्म करता है वही… Read More
किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी अपनी भाषा से होती है। बहु भाषा-भाषी भारत में हिंदी भाषियों की संख्या सर्वाधिक है। आंकड़ो के मुताबिक देश-दुनिया में 125 करोड़ से अधिक लोग हिंदी बोलते/समझते हैं। स्वाधीनता आंदोलन की सशक्त आवाज़ रही… Read More