akh

कविता : आँखो का खेल

मिलाकर आँखे किसी से लुभा उनको लेते है। दिल की गैहरीयों में बसा उनको लेते है। और दिलकी धड़कनो में शमा उनको लेते है। फिर दो आत्माओं का मिलन करा देते है।। मोहब्बत करने वालो का निराला अंदाज होता है।… Read More

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लेख : खूबसूरत मन

खूबसूरत तन महत्व्पूर्ण है या खूबसूरत मन मूल्यवान खूबसूरत मन ईश्वर द्वारा प्रदत्त विरासत है जो प्राणी को सांसों धड़कन के शारीरिक अस्तित्व के अहंकार से  अभिभूत कर आचरण कि संस्कृति संस्कार से बिमुख कर जीवन को भौतिकता के चकाचौध… Read More

bhagwan

कविया :श्रीराम श्रीकृष्ण मिले

चलते चलते मुझे श्रीराम मिल गये । चलते चलते मुझे श्रीकृष्ण मिल गये । बातों ही बातों में वो पूछने लगे। क्या करते हो तुम? मैने कहाँ की मैं एक कवि हूँ जी। सुनकर दोनो जन जोर से हंस पड़े।… Read More

ramraj

लेख : नई चेतना का उदय

साथियों आज कल सत्ता और समय परिवर्तन का दौर चल रहा है। इसी कारण से, में आप से कुछ कहना चाह रहा हूँ। क्या हम सब पहले जैसे भारत का निर्माण करना चाहते है? जिसमे अमन चैन और शांति स्थापित… Read More

kahani

कहानी : खुदा और विसाले सनम

वो लंबे-लंबे कश खींच रहा था मगर उसकी खांसी बदस्तूर जारी थी। सिगरेट न पीने की उसकी आदत सिगरेट से गम गलत करने की उसकी ख्वाहिश पर भारी पड़ रही थी। खांसते खांसते हुये लार उसके चेहरे पर लिपट गयी… Read More

raat

गीत : क्यों बुलाते हो

खनकती चूड़ियाँ तेरी हमें क्यों बुलाती है। खनक पायल की तेरी हमें लुभाती है। हँसती हो जब तुम तो दिल खिल जाता है। और मोहब्बत करने को दिल ललचाता है।। कमर की करधौनी भी तेरी कुछ कहती है। जो प्यास… Read More

naam

कविता : स्वयं की दुनियां

आँखो से क्या कह दिया जिससे मन मचल उठा। दिल मेरा पिघल गया और उसी में मिल गया। जिससे मैं मोहब्बत को उस की तरस गया। और उस से मिलकर प्यार के सागर में डूब गया।। मोहब्बत एक नशा है… Read More

rosni

कविता : मानव-धर्म आबाद रहे

अब तो कर दो प्रभुजी किरपा, मानव-धर्म को सजा सकूँ । धर्म कभी ना कट्टर होवे , मानव-मानव से बचा सकूँ । अब तो कर दो…… पीड़ित भी हूँ ,कुंठित भी हूँ, मन भी मेरा सुलग रहा । मानव-मानव को,… Read More

dhup

कविता : इंसान की जिंदगी

इंसान ही इंसान को लाता है। इंसान ही इंसान को सिखाता है। इंसान ही इंसानियत समझता है। इंसान ही इंसान को मिटाता है।। देखो कही धूप कही छाव है कही ख़ुशी कही गम है। फिर भी इंसान ही क्यों इस… Read More

nirchawar

कविता : खरा उतरु

धरा पर जन्म लेकर किया उपकार जो तुमने। बहुत से पापीयों का किया संग्रहार जो तुमने। इसलिए तो धरा पर बनी है आस्था अब तक। और करते है पूजा-भक्ति लोग हर त्यौहार पर।। पूजते है तुझे हर मजहब के लोग।… Read More