Basu Chatterjee

बासु चटर्जी : मतलब साहित्य और सिनेमा के सेतु

बासु चटर्जी हिंदी और बांग्ला सिनेगा के ऐसे नाम हैं जिनकी फिल्में वास्तव में मध्यवर्गीय जीवन की छोटी – छोटी विसंगतियों को स्वर देती हैं। आम जीवन में पनपे प्रेम की सामाजिक जटिलता को सुलझाती हुई उनकी फिल्में समांतर सिनेमा… Read More

These 12 movies of Zee 5 must watch

ज़ी 5 की ये 12 फिल्में जरूर देखें

भारत पाकिस्तान का नाम एक साथ आते ही हर हिंदुस्तानी या पाकिस्तानी के कान ही खड़े नहीं होते बल्कि दोनों और के दिलों में एक चिंगारी भड़क उठती है जनाब। लेकिन इन दोनों दुश्मन मुल्कों के बीच बहुत बार ऐसे… Read More

जन्मदिन पर विशेष : एसपी बालासुब्रमण्यम

हिंदी सिनेमा के दर्शकों का प्रसिद्ध गायक एसपी बालासुब्रमण्यम से परिचय तब हुआ जब कमल हसन की हिंदी में पहली फिल्म एक दूजे के लिए से हुआ था।  उसका गीत हम बने तुम बने एक दूजे के लिए जबर्दस्त हिट… Read More

कविता : जनता सड़क पर

तन-लोहा मन गलता है, सड़कों पर मजदूर पलता है। मीलों का सफर हैं नंगे पाँव, लौट चलें आ अपने गाँव बहुत हो गया धूप-छांव लौट चलें आ अपने गाँव! छोड़ अरे यह तेरा-तेरी शहरों की यह हेरा-फेरी सड़क किनारे मेरी… Read More

कविता : पगडंडी पर चलकर

घने-गहरे जंगल से गुजरती है पगडंडी कुछ बिखरे पत्तों की सरसराहट पहिये की गति भारी है तरुशिखा पर सुनहरी-आभा-सी डोलती घने जंगलों की छिद्रित परछाइयाॅ-सी मुसकुराकर बोलती रंग-बिरंगे पंखों की फड़फड़ाहट कुछ घरौंदों से उभरती चहचहाहट मृदंग-सी कलकल करती चंचल-अल्हड़… Read More

कविता : महायुद्ध के दौरान

इतिहास के पन्नों से टूटा अतीत के कुरुक्षेत्र का यथार्थ की वैकल्पिक जमीन पर अश्वत्थामा का ब्रह्मस्त्र-सा मानवता का अवकाश विषाणुओं का वीभत्स कालखंड-सा अदृश्य भयावह क्षत-विक्षत चेहरों-सा यम-नगरी की खौफनाक मृदंगों-सी काल-रात्रि और बिना रणभेरी के गर्जना श्वासों की… Read More

कविता : गाँव की ओर

सर पर गठरी तेज धुपहरी  रक्त निकलता, फूटा छाला मन घबराये कदम बढ़ाये कहां मिलेगी छांव कैसे रखें कदम धरा पर जलते मेरे पाॅव… हाय!जलते मेरे पाॅव ! मैं भारत की सच्ची तस्वीर फूट गई मेरी तकदीर ए. सी. में… Read More

कविता : ऐ उम्र

ऐ उम्र! तुम इतनी निश्चित जितनी मृत्यु अनिश्चित मैं रहा धरा पर विभ्रांत समर-सा पर कर न सका यह सुनिश्चित। मेरा अंश बहती गंगा-सा मिल न सका सु-परिचित जल-जल कर मैं राख बन गई जब तीव्र अग्नि हो प्रज्वलित नेत्र-भ्रुकुटी… Read More