“नेपोटिज़्म” हिंदी फिल्म जगत के लिए ही क्यों ? 

सबसे पहले हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि नेपोटिज़्म शब्द की उत्पत्ति कहाँ से हुई और कैसे? नेपोटिज़्म शब्द एक इटालियन शब्द Nepotismo एवं लैटिन भाषा Nepos से लिया गया है। जिसका अर्थ होता है नेफ्यू यानी भतीजा। 17… Read More

ghazal zindagi ke uljhno se

ग़ज़ल : ज़िन्दगी की उलझनों से

ज़िन्दगी की उलझनों से, हम मजबूर हो गए ! अब हर किसी की नज़र से, हम बेनूर हो गए ! कभी सोचा था कि चलना ही ज़िन्दगी है यारा , मगर सफर के हालात से, हम मजबूर हो गए !… Read More

song mohabbat rang lati hai

गीत : मोहब्बत रंग लाती है

नियत में खोट हो तो, मोहब्बत रंग कैसे लाएगी। तमंनये दिल की, दफन दिलमें हो जाएगी। मोहब्बत का कोई, जाति धर्म नहीं होता। ये तो वो आग है जो, पहले आंखों से लगता।। दिलो में प्रेम भाव, जो इंसान रखता… Read More

parinam poem

कविता : परिणाम

खेल खेलो ऐसा की किसी को समझ न आये। लूट जाये सब कुछ कोई समझ न पाए। कर्ताधर्ता कोई और है पर दाग और पर लग जाये। और मकरो का रास्ता आगे साफ हो जाये।। देश का परिदृश्य अब बदल… Read More

poem wo dekhti hai sapne

कविता : वो देखती है सपने

वो देखती है सपने, रात रात भर जाग के, चाँद तारों को आसमां में निहारते, वो देखती है सपने । वो देखती है सपने, अपने पिया से मिलन के, अपने विह्वल मन को समझाते, वो देखती है सपने । वो… Read More

poem kargil vijay diwas

कविता : कारगिल विजय

सन् निन्यानवे था थी वो माह जुलाई शत्रु से हमारी पुनः छिड़ी हुई थी लड़ाई मार रहे थे शत्रुओं को हमारे वीर महान् राष्ट्र की रक्षा हेतु दे रहे थे बलिदान दिन सोमवार था वो तिथि छब्बीस जुलाई कारगिल पर… Read More

poem koi sikayat nahi

कविता : कोई शिकायत नहीं

हंसनेवालों को हंसने दो यह नयी बात तो नहीं अपने रास्ते पर चलनेवालों को मैं फिसलता हूँ, गिरता हूँ लड़खड़ाता हूँ तो क्या विचारों की दुनिया में एक स्वतंत्रता है, अंतर्वस्तु है मेरी सामाजिक चिंतन में समर्पित हूँ अपना कुछ… Read More

mukatak jamana lekhan hunar

मुक्तक ज़माना, लेखन और हुनर

ज़माना “हम सब ज़माने की शर्तों पर चल रहे है, जैसे पान में कत्थे के संग चुना मल रहे है, वक़्त बदला नही है किसी का अभी तक, लेकिन हम सब वक़्त के साथ बदल रहे है।” लेखन “अभी लेखन… Read More

song mohbbat ka sandesh

गीत : मोहब्बत का संदेश

मोहब्बत का एक संदेश, तुम्हे हम भेज रहे है। लगाकर दिलसे तुम इसे, रख लेना अपने पास। फिर भी याद आये तो, बुला लेना दिलसे तुम। मैं आ जाऊंगा तुम्हारे पास, बुलाना सच्चे मनसे तुम।। बहुत गहरी होती है, मोहब्बत… Read More

poem chandani raat

कविता : चांदनी रात

ओढ़कर प्यार की चुनरिया, चांदनी रात में निकलती हो। तो देखकर चांद भी थोड़ा, मुस्कराता और शर्माता है। और हाले दिल तुम्हारा, पूछने को पास आता है। हंसकर तुम क्या कह देती हो, की रात ढलते लौट जाता है।। चांदनी… Read More