सर्दी मौसम में प्यार मोहब्बत की आपस में बातें होती है। सर्दी मौसम में मोहब्बत निभाने कि कसमे खाई जाती है। और चलता है दौर आपस में मेल मिलाप करने का। पर होती है दिलको पीड़ा सर्दी में बिछड़ ने… Read More
सर्दी मौसम में प्यार मोहब्बत की आपस में बातें होती है। सर्दी मौसम में मोहब्बत निभाने कि कसमे खाई जाती है। और चलता है दौर आपस में मेल मिलाप करने का। पर होती है दिलको पीड़ा सर्दी में बिछड़ ने… Read More
रास्ता सीधा नहीं होता धरती के अनुरूप वह,करवट लेता रहता है कभी बायें की ओर,कभी दायें की ओर सीधा चलनेवाले को,टक्कर लेना पड़ता है कहीं पत्थरों से,कहीं कांटों से सरल नहीं होता है उसे उतार-चढ़ावों को पारकर अपने रास्ते से… Read More
तेरी मेहनत रंग लाई है तभी खुशियाँ घर आई है। आंगन में किलकारी गूँज रही और दिल में तरंगे छाई है। सच मानो जैसे आज ही घर में दिवाली आई है। सभी के दिलों में देखो अपार खुशियाँ छाई है।।… Read More
जुड़ती है सड़क एक सड़क से बासी रोटी ने महका रखा है घर को मैं कौन,निश्चित मैं मौन हूँ टूटी हैं बेड़ियां ,लड़कर थकी नहीं ,सड़क का कूड़ा , समय से लड़ती कूची दिमाग का दही बनाती है कविता ”… Read More
उठो मन!अभी तुम्हें बहुत चलना है, कदम रखकर आगे अभी और बढ़ना है। कि अभी मंजिल न आयी है तुम्हारी भ्रम में रहकर न रुकना है। उठो मन! अभी तो तुम्हें फिर चलना है, विपरीत बहती धाराओं में तो अभी… Read More
हमारा है प्यारा बहुत देश जिसमें रहते हर धर्म के लोग ये हमारा हिंदुस्तान है..। जिसमें बसते सबके प्राण तभी तो करते सब प्यार ये हमारा हिंदुस्तान है..।। जहाँ अनेकता में एकता नजर आती है सदा ये हमारा हिंदुस्तान है..।… Read More
जिसमें रहते सर्वधर्म इंसान। विश्व में अलग ही है पहचान। जिसे लोग कहते हिंदुस्तान। ये देश है बहुत महान।। जो नारी की लाज लूटते है। नहीं उनको देते है सम्मान। चाहे वो मुल्ला हो या महाराज। नहीं है देश में… Read More
सुनता हूँ जवानो की गाथा आज आँसुओं को भरके। गोलिया खाते है सीने पर घायल दिल होता है। चोट खाकर भी जवान हँसता मुकरता रहता है। खाई है जो कसम इन्होंने देश पर मर मिटने की।। आंच आने नहीं देंगे… Read More
देख है जब से तुमको ये दिल बहुत बैचैन है। और दिल की धड़कने बहुत तेज हो रही। आँखो को भी एक खोज चल रही है। और चेहरे पर भी मेरे उदासी छा रही।। बहुत देखा है मैंने अपने इस… Read More
मकर संक्रांति आई हैं एक नई क्रांति लाई हैं निकलेंगे घरों से हम तोड़ बंधनों को सब जकड़ें हैं जिसमें सर्दी से बर्फ़ शीत की गर्दी से हटा तन से रजाई हैं मकर संक्रांति आई हैं एक नई क्रांति लाई… Read More