bunde

कवित : सर्दी का मौसम और

सर्दी मौसम में प्यार मोहब्बत की आपस में बातें होती है। सर्दी मौसम में मोहब्बत निभाने कि कसमे खाई जाती है। और चलता है दौर आपस में मेल मिलाप करने का। पर होती है दिलको पीड़ा सर्दी में बिछड़ ने… Read More

vichar

कविता : विचारों की दुनिया में

रास्ता सीधा नहीं होता धरती के अनुरूप वह,करवट लेता रहता है कभी बायें की ओर,कभी दायें की ओर सीधा चलनेवाले को,टक्कर लेना पड़ता है कहीं पत्थरों से,कहीं कांटों से सरल नहीं होता है उसे उतार-चढ़ावों को पारकर अपने रास्ते से… Read More

desh bhakti

कविता : रंग लाती है

तेरी मेहनत रंग लाई है तभी खुशियाँ घर आई है। आंगन में किलकारी गूँज रही और दिल में तरंगे छाई है। सच मानो जैसे आज ही घर में दिवाली आई है। सभी के दिलों में देखो अपार खुशियाँ छाई है।।… Read More

lekha

व्यंग्य : कुविता में कविता

जुड़ती है सड़क एक सड़क से बासी रोटी ने महका रखा है घर को मैं कौन,निश्चित मैं मौन हूँ टूटी हैं बेड़ियां ,लड़कर थकी नहीं ,सड़क का कूड़ा , समय से लड़ती कूची दिमाग का दही बनाती है कविता ”… Read More

josh

कविता : उठो मन

उठो मन!अभी तुम्हें बहुत चलना है, कदम रखकर आगे अभी और बढ़ना है। कि अभी मंजिल न आयी है तुम्हारी भ्रम में रहकर न रुकना है। उठो मन! अभी तो तुम्हें फिर चलना है, विपरीत बहती धाराओं में तो अभी… Read More

desh

गीत : प्यारा भारत देश

हमारा है प्यारा बहुत देश जिसमें रहते हर धर्म के लोग ये हमारा हिंदुस्तान है..। जिसमें बसते सबके प्राण तभी तो करते सब प्यार ये हमारा हिंदुस्तान है..।। जहाँ अनेकता में एकता नजर आती है सदा ये हमारा हिंदुस्तान है..।… Read More

deshprem

गीत : नहीं है देश प्यार तो

जिसमें रहते सर्वधर्म इंसान। विश्व में अलग ही है पहचान। जिसे लोग कहते हिंदुस्तान। ये देश है बहुत महान।। जो नारी की लाज लूटते है। नहीं उनको देते है सम्मान। चाहे वो मुल्ला हो या महाराज। नहीं है देश में… Read More

kargil

कविता : भारत के जवान

सुनता हूँ जवानो की गाथा आज आँसुओं को भरके। गोलिया खाते है सीने पर घायल दिल होता है। चोट खाकर भी जवान हँसता मुकरता रहता है। खाई है जो कसम इन्होंने देश पर मर मिटने की।। आंच आने नहीं देंगे… Read More

young

कविता : सपने भी सच होते है

देख है जब से तुमको ये दिल बहुत बैचैन है। और दिल की धड़कने बहुत तेज हो रही। आँखो को भी एक खोज चल रही है। और चेहरे पर भी मेरे उदासी छा रही।। बहुत देखा है मैंने अपने इस… Read More

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कविता : मकर संक्रांति आई हैं

मकर संक्रांति आई हैं एक नई क्रांति लाई हैं निकलेंगे घरों से हम तोड़ बंधनों को सब जकड़ें हैं जिसमें सर्दी से बर्फ़ शीत की गर्दी से हटा तन से रजाई हैं मकर संक्रांति आई हैं एक नई क्रांति लाई… Read More