चाह नहीं, गुरु द्रोण सा बनकर, खातिर अर्जुन, एकलव्य मिटाऊँ। इतनी सी बस, चाह जरूर कि, बन चाणक्य, कई चन्द्र खिलाऊँ।। चाह नहीं, वो देवों की सी, सुबह शाम पूजा जाऊँ। इतनी सी बस, चाह जरूर कि, मानव का मैं,… Read More
चाह नहीं, गुरु द्रोण सा बनकर, खातिर अर्जुन, एकलव्य मिटाऊँ। इतनी सी बस, चाह जरूर कि, बन चाणक्य, कई चन्द्र खिलाऊँ।। चाह नहीं, वो देवों की सी, सुबह शाम पूजा जाऊँ। इतनी सी बस, चाह जरूर कि, मानव का मैं,… Read More
मुसीबत का पहाड़, कितना भी बड़ा हो। पर मन का यकीन, उसे भेद देता है। मुसीबतों के पहाड़ों को, ढह देता है। और अपने कर्म पर, जो भरोसा रखता है।। सांसारिक उलझनों में, उलझा रहने वाला इंसान। यदि कर्म प्रधान… Read More
बेटी को जन्मदिन की दिल से शुभ कामनाएं और देता हूँ शुभ आशीष। प्रगति के पथ पर चलकर करो नाम अपना रोशन। सबकी प्यारी सबकी दुलारी तभी हृदय में सबके बसती। और ख्याल सभी का बेटी जो तुम दिलसे रखती… Read More
वो मोहब्बत में इतने घाव देते रहे। हम उन्हें उनका उपहार समझते रहे। पर हद तो तब हो गई जब मेरे दिये। फूलों को उन्होंने आर्थी पर रख दिये। और जिंदा होते हुये भी वो अपनी। मोहब्बत को मेरी सामने… Read More
मिलते मिलाते पहुँच गये। हम आज उस मंजिल पर। जहाँ सब को पहुंचना है। आखिर में एक दिन।। जिंदगी को जी गये। एक चुनौती मानकर। सब कुछ लगा दिया अपना। इसे एक लक्ष्य समझकर।। मरता रहा औरो के लिए। खुद… Read More
खुशी के कुछ पल आकर के महका देते है घर को वो। फिर वो ही सुंदर पल हमें अंधेरो में फिर ले जाते है। सफर मेरी जिंदगी का इसी तरह से निकला है। कभी खुशियाँ रही तो कभी गमों ने… Read More
1- “जब सांझ ढले तुम आती हो “ जब सांझ ढले तुम आती हो आती है तब इक मंद बयार छेड़े गए हों जैसे मन के तार झंकृत होता है ज्यों अंतर्मन जैसे दूर कहीं रहा हो कीर्तन जैसे कोई… Read More
जाता हूँ जिन राहों पर चल के, माँ कहती है तुम चलना तन के। काँटों पर चलना सिखाती है मुझको, धूप आए मगर आँचल से छन के। कहती है मेरे पास है सब कुछ, निकलती नही वो कभी बन ठन… Read More
क्या क्या अब तक देख चुका। और क्या क्या देखना बाकी है। जीवन की इस राह पर क्या क्या सहना बाकी है। बंद आँख और मुँह कान इसका मूल आधार है।। गुमशुम रहना और सहना तेरा ये आधार नहीं। चलना… Read More
स्थिरता हो मन में जिसके वो मनमीत चुनो तुम, ये चकाचौंध बहुत भटकाती है सादगी भा जाये जिसकी वो मनमीत चुनो तुम, ये दुनिया झूठे ख्वाब बहुत दिखाती है हर भावों को न तौलौ तुम समाज के दकियानूसी तराजू में,… Read More