संसार-सागर सिर्फ समय-सराय , परमात्मा से बिछड़, आत्मा यहां आय। पार्थिव तत्वों को उसने ही गूँथकर, घररूपी नश्वर शरीर बनाया । हाथ खुले रखकर है जाना , फिर क्यों सोचे..? कि क्या तूने कमाया ..? पाने से ज्यादा तू खोकर… Read More
संसार-सागर सिर्फ समय-सराय , परमात्मा से बिछड़, आत्मा यहां आय। पार्थिव तत्वों को उसने ही गूँथकर, घररूपी नश्वर शरीर बनाया । हाथ खुले रखकर है जाना , फिर क्यों सोचे..? कि क्या तूने कमाया ..? पाने से ज्यादा तू खोकर… Read More
संबंधों की सब हरियाली सूखी जीवन हो जैसे इक बलि वेदी गलना ,ढहना,तिल -तिल मरना जीवन ने चुना मृत्यु का गहना उम्मीद न रही कोई भी बाकी अब कौन सा रंग बचा साथी मन मंदिर की मूरत खंडित की निरपराध… Read More
नजारा देखकर यहाँ का दिल रुकने को कहता है। फूलो के बाग में देखो भवरा कुछ कहता है। तभी तो झूलते फूलों से महक बहुत आती है। जो मोहब्बत करने वालों को बहुत लूभाते है।। देखो तो फूलों की किस्मत… Read More
दो दिन से जुम्मन दो निवाले भी ठीक से नहीं खा पा रहा था । चाय पर चाय पीता और पेशाब जाता । उसके बाद बीड़ी पर बीड़ी पीता जाता और बेतरह खांसता था। उसकी खांसी इतनी देर तक चलती… Read More
मोहब्बत करने वाले अंजाम से नहीं डरते। जब मिल जाते है उनके किसीसे अंजान से नैन। तो दिलमें आग सी उनके अंदर लग जाती है। फिर उसी आगे के पीछे लगा देते अपना जीवन।। मोहब्बत वो नशा है जिस पर… Read More
किसी के दर्द को तुम कभी मेहसूस करो तुम। तो जिंदगी की सच्चाई तुम्हें समझ आयेगी। तभी तुम दुनियाँ को सही में जान पाओगें। फिर हो सकता की तुम खुदको पहचान पाओगें।। बहुत जालीम है लोगों हमारी ये दुनियाँ। जिसे… Read More
हो अगर रात सुहानी तो दिन सुहाना लगता है। हर किसी की किस्मत में ये लम्हा कहाँ आता है। ये तो शुक्र है मोहब्बत का जिसके कारण ये लम्हें आते है। कुछ की जिंदगी साभर जाती तो कुछ की बिगड़… Read More
जिंदगी गुजर गई कल के इंतजार में। पर आज तक तो कल आया ही नहीं। दुनियाँ के इतिहास में कल कभी आया नहीं। क्योंकि कल किसी के जीवन में आयेगा ही नहीं।। कल के चक्कर में न जाने कितने काल… Read More
कही पर दिल है कही पर जान है। जुबा से भी दोनों हम एक जान है। करनी कथनी में भी हम दोनों समान है। इसलिए दुनियां मेें यारो हम दोनों साथ है।। मत देखो हमें यारो दो जिस्म की तरह।… Read More
यह चांदनी रात कितनी निराली यह तो मदवाली है।। श्वेत चंद्रमा रजत रश्मियां, रूप यौवन से अपनी छटा बीखराती।। चांदनी रात में सुंदर रूप वसुंधरा का आंचल महाकाती ।। सतरंगी पुष्प – लताओं से करती श्रृंगार खेत खलिहानों की लहलहाती… Read More