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काव्य : क्या कमाया

संसार-सागर सिर्फ समय-सराय , परमात्मा से बिछड़, आत्मा यहां आय। पार्थिव तत्वों को उसने ही गूँथकर, घररूपी नश्वर शरीर बनाया । हाथ खुले रखकर है जाना , फिर क्यों सोचे..? कि क्या तूने कमाया ..? पाने से ज्यादा तू खोकर… Read More

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कविता : अब कौन सा रंग बचा साथी

संबंधों की सब हरियाली सूखी जीवन हो जैसे इक बलि वेदी गलना ,ढहना,तिल -तिल मरना जीवन ने चुना मृत्यु का गहना उम्मीद न रही कोई भी बाकी अब कौन सा रंग बचा साथी मन मंदिर की मूरत खंडित की निरपराध… Read More

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कविता : कहानी फूलों की

नजारा देखकर यहाँ का दिल रुकने को कहता है। फूलो के बाग में देखो भवरा कुछ कहता है। तभी तो झूलते फूलों से महक बहुत आती है। जो मोहब्बत करने वालों को बहुत लूभाते है।। देखो तो फूलों की किस्मत… Read More

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लघुकथा : खून सनी रोटी

दो दिन से जुम्मन दो निवाले भी ठीक से नहीं खा पा रहा था । चाय पर चाय पीता और पेशाब जाता । उसके बाद बीड़ी पर बीड़ी पीता जाता और बेतरह खांसता था। उसकी खांसी इतनी देर तक चलती… Read More

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कविता : अंजान की खोज

मोहब्बत करने वाले अंजाम से नहीं डरते। जब मिल जाते है उनके किसीसे अंजान से नैन। तो दिलमें आग सी उनके अंदर लग जाती है। फिर उसी आगे के पीछे लगा देते अपना जीवन।। मोहब्बत वो नशा है जिस पर… Read More

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कविता : नहीं जाना दुनियाँ को

किसी के दर्द को तुम कभी मेहसूस करो तुम। तो जिंदगी की सच्चाई तुम्हें समझ आयेगी। तभी तुम दुनियाँ को सही में जान पाओगें। फिर हो सकता की तुम खुदको पहचान पाओगें।। बहुत जालीम है लोगों हमारी ये दुनियाँ। जिसे… Read More

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कविता : राह आसान नहीं

हो अगर रात सुहानी तो दिन सुहाना लगता है। हर किसी की किस्मत में ये लम्हा कहाँ आता है। ये तो शुक्र है मोहब्बत का जिसके कारण ये लम्हें आते है। कुछ की जिंदगी साभर जाती तो कुछ की बिगड़… Read More

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कविता : कल के चलते

जिंदगी गुजर गई कल के इंतजार में। पर आज तक तो कल आया ही नहीं। दुनियाँ के इतिहास में कल कभी आया नहीं। क्योंकि कल किसी के जीवन में आयेगा ही नहीं।। कल के चक्कर में न जाने कितने काल… Read More

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कविता : ये है मोहब्बत

कही पर दिल है कही पर जान है। जुबा से भी दोनों हम एक जान है। करनी कथनी में भी हम दोनों समान है। इसलिए दुनियां मेें यारो हम दोनों साथ है।। मत देखो हमें यारो दो जिस्म की तरह।… Read More

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कविता : चांदनी रात

यह चांदनी रात कितनी निराली यह तो मदवाली है।। श्वेत चंद्रमा रजत रश्मियां, रूप यौवन से अपनी छटा बीखराती।। चांदनी रात में सुंदर रूप वसुंधरा का आंचल महाकाती ।। सतरंगी पुष्प – लताओं से करती श्रृंगार खेत खलिहानों की लहलहाती… Read More