किसी की मोहब्बत में खुद को मिटा कर कभी हम भी देखेंगे अपना आशियां अपने हाथों से जला कर कभी हम भी देखेंगे ना रांझा ना मजनूं ना महिवाल बनेंगे इश्क में किसी के महबूब बिन होती है ज़िंदगी कैसी… Read More
किसी की मोहब्बत में खुद को मिटा कर कभी हम भी देखेंगे अपना आशियां अपने हाथों से जला कर कभी हम भी देखेंगे ना रांझा ना मजनूं ना महिवाल बनेंगे इश्क में किसी के महबूब बिन होती है ज़िंदगी कैसी… Read More
पुरानी यादों के सहारे, जिये जा रहा हूँ मैं । तुझे याद है कि नहीं, मुझे कुछ पता नही। तेरी बेरुखी अब मुझसे, नहीं देखी जा रही। तुझे कुछ पता है कि मैं कैसे जी रहा तेरे बिना।। मुझे मालूम… Read More
दिल की चाहत कल भी तुम थे आज भी तुम हो मेरी ज़रूरत कल भी तुम थे आज भी तुम हो तुमने तो मुझे कबका भुला दिया मेरी आदत कल भी तुम थे आज भी तुम हो तुमने न जाना… Read More
“सबसे विकट आत्मविश्वास मूर्खता का होता है, हमें एक उम्र से मालूम है – हरिशंकर परसाई”। फिल्मों की “द फैक्ट्री “चलाने वाले निर्देशक राम गोपाल वर्मा महोदय ने डर के लेकर दिलचस्प प्रयोग किये।वो अपनी किसी फेम फिल्म में डर… Read More
भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस के अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में साहित्य संस्कृति फाउंडेशन द्वारा कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर फाउंडेशन की ओर से सांस्कृतिक, सामाजिक क्षेत्र में… Read More
अलविदा 2019 Welcome 2020 ‘साहित्य सिनेमा सेतु’ वेबपोर्टल के लिए साहित्य, सिनेमा, शिक्षा, समाज और कला एवं संस्कृति आदि से संबंधित विषयों पर लेख/रचना आमंत्रण सिनेमा 2019 की टॉप 10 बॉलीवुड फिल्म 10 हॉलीवुड फिल्म 10 शॉर्ट फिल्म 10 वेब… Read More
रिपोर्टर कैमरामैन को लेकर रिपोर्टिंग करने निकला।वो कुछ डिफरेंट दिखाना चाहता था डिफरेंट एंगल से ।उसे सबसे पहले एक बच्चा मिला । रिपोर्टर ,बच्चे से-“बेटा आपका इस कानून के बारे में क्या कहना है”? बच्चा हँसते हुये-“अच्छा है,अंकल इस ठण्ड… Read More
“हुजूर,आरिजो रुख्सार क्या तमाम बदन मेरी सुनो तो मुजस्सिम गुलाब हो जाए, गलत कहूँ तो मेरी आकबत बिगड़ती है जो सच कहूँ तो खुदी बेनकाब हो जाए” इधर सताए हुए कुछ लोगों के जख्मों पर फाहे क्या रखे गए उधर… Read More
पुस्तक – कुछ नीति कुछ राजनीति लेखक – भवानीप्रसाद मिश्र पुस्तक समीक्षा – मयंक रविकान्त अग्निहोत्री भारतीय साहित्यिक इतिहास में श्रेष्ठ रचनाकारो की गिनती में भवानीप्रसाद मिश्र जी को सम्मिलित किया जाता है। कुछ नीति कुछ राजनीति पुस्तक उनके श्रेष्ठ… Read More
बनी धाय थी ,वही गाय हूं, करते क्यों तुम तिरस्कार । किस दिन लौटे,फिर जीवन में, मेरे वो… Read More