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संस्मरण : परख

तुम देवी हो या चुड़ैल..? मै मानता हूं तेरा गुनाहगार हूं. तुम आज वर्षो बाद मिल रही हों. तुम्हें मुझसे कई सारी शिकायते हो रही है कि- “मैं कहा करता था कि तुम मेरी लिए देवी हो. मै तुम्हारें सिवाय… Read More

कविता : मनुष्य क्या है

संजय कहता है,  की खुद”को I खुद के अंदर, ही सर्च करो I अपने कर्माें पर भी, कभी तो रिसर्च करो। तभी हमें जीवन का, सही मूल्यांकन मिलेगा। हम कितने सही और, कितने गलत हैI यही पर हमें और, आप… Read More

कभी हताश कभी निराश जीवन

परिस्थिति जनक वैश्विक सत्य घटनाओं पर आधारित हृदय को स्पर्श करती स्मृतियाँ टिड्डी हमला, कोरोना हमला, सरकारी हमला, नेपाल-भारत हमला, चीन-भारत व अमेरिकी हमला,अम्फान हमला, निसर्ग हमला, जॉर्ज फ्लॉयड पर हमला, हमला दर हमला, भूख-प्यास पर हमला, मानवता पर हमला,… Read More

mera dil sochta hai

कविता : दिल सोचता है

मेरे दिल कि सरहद  को पार न करना नाज़ुक है दिल मेरा वार न करना खुद से बढ़कर भरोसा है मुझे तुम पर इस भरोसे को तुम बेकार न करना । दूरियों की ना  परवाह कीजिए दिल जब भी पुकारे… Read More

poem barbadi ki rah

कविता : बर्बादी की राह

किताबो में पढ़ कर, रेडियो में सुन कर। कहानियां मोहब्बत की, बड़े बूड़ो से सुनकर। मोहब्बत करने का मन, दिल में पनापने लगा। और लगा बैठे दिल अपना, अपने पड़ोसी की लड़की से।। अब न दिल धड़कता है, न सांसे… Read More

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ग़ज़ल : इश्क़ में दो पल

इश्क़  में  दो  पल  ज़रूरत  से  हां  कुछ ज़्यादा लगेंगे इस  जनम  में  गर नहीं  तो  उस जनम में  हीं  मिलेंगे लाख़   दुश्मन   हो   ज़माने   में   ज़ुदा   कैसे    करेंगे आशनाई   की  हिफ़ाज़त  जब  ख़ुदा  ख़ुद  ही रखेंगे गर जो … Read More

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पूर्व मध्यकालीन साहित्य : मूल्यों की उद्भावना

मध्यकाल इतिहास के पन्नों पर ‘संक्रांत युग’ के रूप में दर्ज़ है। इतिहास साक्षी है कि क्रांति सदैव नए मूल्य स्थापित करती है। पूर्व मध्यकालीन साहित्य में स्थापित मूल्यों पर बात करने से पहले एक दृष्टि इस तत्व पर कि… Read More