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कविता : लेखा जोखा

हनन और दमन तुम  दूसरों का कर रहे हो। उसकी आग में अपने भी जल रहे हैं। कब तक तुम दुसरो को ररुलाओगें। एक दिन इस आग में खुद भी जल जाओगों। और अपने किये पर बहुत पषताओगें। पर उस… Read More

ग़ज़ल : अब तू ग़ैर है 

मैं जानता हूँ कि अब तू ग़ैर है मुझे जीना भी तेरे बग़ैर है फिर भी मोहब्बत है तुझसे मेरे दिल को मुझसे ही बैर है बसा रखा है तुझे इन आँखों में मेरा मन ही बना मेरा दैर है… Read More

संस्मरण : परख

तुम देवी हो या चुड़ैल..? मै मानता हूं तेरा गुनाहगार हूं. तुम आज वर्षो बाद मिल रही हों. तुम्हें मुझसे कई सारी शिकायते हो रही है कि- “मैं कहा करता था कि तुम मेरी लिए देवी हो. मै तुम्हारें सिवाय… Read More

कविता : मनुष्य क्या है

संजय कहता है,  की खुद”को I खुद के अंदर, ही सर्च करो I अपने कर्माें पर भी, कभी तो रिसर्च करो। तभी हमें जीवन का, सही मूल्यांकन मिलेगा। हम कितने सही और, कितने गलत हैI यही पर हमें और, आप… Read More

कभी हताश कभी निराश जीवन

परिस्थिति जनक वैश्विक सत्य घटनाओं पर आधारित हृदय को स्पर्श करती स्मृतियाँ टिड्डी हमला, कोरोना हमला, सरकारी हमला, नेपाल-भारत हमला, चीन-भारत व अमेरिकी हमला,अम्फान हमला, निसर्ग हमला, जॉर्ज फ्लॉयड पर हमला, हमला दर हमला, भूख-प्यास पर हमला, मानवता पर हमला,… Read More

mera dil sochta hai

कविता : दिल सोचता है

मेरे दिल कि सरहद  को पार न करना नाज़ुक है दिल मेरा वार न करना खुद से बढ़कर भरोसा है मुझे तुम पर इस भरोसे को तुम बेकार न करना । दूरियों की ना  परवाह कीजिए दिल जब भी पुकारे… Read More

poem barbadi ki rah

कविता : बर्बादी की राह

किताबो में पढ़ कर, रेडियो में सुन कर। कहानियां मोहब्बत की, बड़े बूड़ो से सुनकर। मोहब्बत करने का मन, दिल में पनापने लगा। और लगा बैठे दिल अपना, अपने पड़ोसी की लड़की से।। अब न दिल धड़कता है, न सांसे… Read More