जिंदगी है महंगी , और मौत क्यों हो गई सस्ती….?? हाय रे…….!! ये कैसी अनजान मस्ती । छोटी-छोटी सतही बातों पर, क्यों हो रही है जीवन की केवल पस्ती और पस्ती (हार)? जीवन में कभी क्या कोई हार न होगी… Read More
जिंदगी है महंगी , और मौत क्यों हो गई सस्ती….?? हाय रे…….!! ये कैसी अनजान मस्ती । छोटी-छोटी सतही बातों पर, क्यों हो रही है जीवन की केवल पस्ती और पस्ती (हार)? जीवन में कभी क्या कोई हार न होगी… Read More
बचपन खोकर आई जवानी, साथ में लाई रंग अनेक। दिलको दिलसे मिलाने को, देखो आ गई ये जवानी। अंग-अंग अब मेरा फाड़कता, आता जब सावन का महीना। नए-नए जोड़ों को देखकर, मेरा भी दिल खिल उठता।। अंदर की इंद्रियों पर… Read More
बचपन खोकर आई जवानी, साथ में लाई रंग अनेक दिलको दिलसे मिलाने को, देखो आ गई अब ये जवानी अंग-अंग अब मेरा फाड़कता, आता जब सावन का महीना नए-नए जोड़ों को देखकर, मेरा भी दिल खिल उठता। अंदर की इंद्रियों… Read More
बहुत दिनों से मेरी फड़क रही थी आँखे। कोई शुभ संदेश अब शायद मिलने वाला है। फिर एकका एक तुम्हें आज यहाँ पर देखकर। अचंभित हो गया मैं तुम्हें सामने देखकर।। रुलाया है बहुतो को जवानी के दिनों में। कुछ… Read More
मेरा मेहबूब आया है जन्नत के इस बाग में। जिसे सजाया है वसुन्धरा ने चाँद और सितारों से । धरा ने भी बिछा दी है सफेद चादर मोतीयों की। और महका के रख दिया है रातरानी ने इस बाग को।।… Read More
दिया है जो तोफा तुमने जिसे बता नहीं सकते। और अपनी खुशी को हम छुपा भी नहीं सकते। मना जो उसने किया है इसे बताने के लिए। करें तो क्या करें अब हम बना रहे दोनों का संतुलन।। बड़े आदर… Read More
सावन के मास में वो, शिवजी पर जल ढारत है। बेल पत्ती और फूलों से, पूजा नित्यदिन करती हैं। मनोकामना पूरी कर दो, सावन के इस महीने में। मिलवा दो प्रभु अब मुझे, उस जीवन साथी से। जिसके सपने देख… Read More
खिले कमल कीचड़ में कैसे, गहन अंधेरा दीप जले। उल्टे बांस बरेली जैसे , मछली उल्टी धार चले। तूफान भरे सागर में वो ही , जीवन नइया चलाता है । कर जिगरा फौलाद का अपना , चिड़िया बाज लड़ाता है… Read More
सावन का महीना चल रहा शिव-पार्वती जी का आराम। गृहस्थ और कुवारों को भी काम काज से मिली है छुट्टी। जिसके चलते कर सकते है शिव पार्वती जी की भक्ति। श्रध्दा भक्ति हो गई कबूल तो मिल जायेंगे साक्षात तुम्हें… Read More
बड़ी ही अजीब किस्सा रहा मेरी जिंदगी का। वो मुझे चाह कर अपने पास बुलाते रहे। पर मैं अपने आपको और कुछ समझता रहा। और उनकी चाहत को हंसी में उड़ाता रहा।। कहते है वक्त सदा एक जैसा नहीं होता।… Read More