kanaha (2)

कविता : तरस रही हूँ

मोम की तरह पूरी रात दिल रोशनी से पिघलता रहा। पर वो इस हसीन रात को नहीं आये मेरे दिल में। मैं जलती रही और नीचे फिरसे जमती रही। फिरसे उनके लिए जलने और उनके दिलमें जमाने के लिए।। हर… Read More

loverss

कविता : सावन की आग

बचपन खोकर आई जवानी साथ में लाई रंग अनेक। दिलको दिलसे मिलाने को देखो आ गई अब ये जवानी। अंग अंग अब मेरा फाड़कता आता जब सावन का महीना। नये नये जोड़ो को देखकर मेरा भी दिल खिल उठता।। अंदर… Read More

river

कविता : सुधार लो गलतियाँ

कुछ खोता हूँ कुछ पाने को कुछ खाता हूँ जीने को। पर क्यों नहीं बच पाता हे मानव तू अपने कर्मो से। दान दया धर्म आदि भी तू आज कल बहुत कर रहा। पर वर्षो से जो कर रहा था… Read More

human alone

कविता : क्या समझे और क्या जाने

जो डरता है स्वयं से उसे सफलता मिलती है। और समझ पता है वो इस कलयुगी संसार को। डराने धमकाने वाले तो बहुत है घर बहार में। पर जो स्वयं से डरता है वो औरों से क्या डरेगा। तभी तो… Read More

peole alone

कविता : एकाकी हो गये

सफर में हम निकले है बहुत दिनों के बाद। छुट गई है अब आदत लोकल में चलने की। पहले ही जिंदगी की आधी उम्र निकल दिये है। मुंबई की लोकल ट्रेन में हम चल चल कर।। कैसे किया जिंदगी को… Read More

man waiting

कविता : ख्यावों से चैन मिलता है

बहुत बेचैन रहकर के जीआ हूँ अब तक मैं। तन्हाईयों ने भी मेरा दिया है साथ इसमें। तभी तो अव्यवस्थित बना रहा मेरा जीवन। किसे मैं दोष दू इसका नहीं कर सका फैसला।। बहुत मायूस जब होता हूँ तो चला… Read More

maa

कविता : मेरी ढाल

सिखाया जिसने जीना मुझको वही छोड़कर चली गई। जलाये जिसने अंधेरो में दीपक वो न जाने कहाँ खो गई। सिखाया जिसने लिखना पढ़ना पता नहीं वो क्यों रूठ गई। सच कहे की हमारा आधार अब जिंदगी का नहीं बचा।। हमें… Read More

sunset side

कविता : अँखियाँ ललायत है

ललायत रहत है अँखियां तुम्हें रोज देखन को। जो दिख जाएँ तुमरो सुंदर चेहरा सुबेहरे मुझेखो। तो दिन मोरो निकलत है बहोतई नो नो नो सो। तबाई तो व्याकुल रहात है मोरी अँखियाँ रोजाई।। बहोताई मैं सोचत हो अब तुमरे… Read More

bride love

कविता : चलो सैर पर चले

चलो सैर पर चले जिंदगी संवर जायेगी। रातों के ख्यालों में खो जाये दिलमें कमल खिल जायेंगे। जो ख्यालों में हमारे रोज आती जाती है। और अपने नये नये रूप हमें दिखती है। सच कहे अगर तुमसे तो हमें भी… Read More

chandani rat

कविता : मौसम और मोहब्बत

हल्की हल्की बारिस में मज़ा बहुत आता है। जैसे जैसे गिरती है बदन पर पानी की बूंदे। अजब सी गुद गुदी मेहसूस होने लगती है। और कमल से फूल खिल उठते है अंदर ही अंदर।। मुझे ज्यादा पसंद है चांदनी… Read More