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समीक्षा : स्त्री परिधि के बाहर

‘स्त्री परिधि के बाहर’ उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपद सोनभद्र की रहने वाली डॉ. संगीता की 2021 में प्रकाशित आलोचनात्मक पुस्तक है। इस पुस्तक में उन्होंने हिंदी साहित्य में स्त्री आत्मकथा का विवेचन व विश्लेषण किया है तथा हिंदी साहित्य… Read More

love boy

कविता : सावन में रंग अनेक

बचपन खोकर आई जवानी, साथ में लाई रंग अनेक। दिलको दिलसे मिलाने को, देखो आ गई ये जवानी। अंग-अंग अब मेरा फाड़कता, आता जब सावन का महीना। नए-नए जोड़ों को देखकर, मेरा भी दिल खिल उठता।। अंदर की इंद्रियों पर… Read More

kate

गीत : कर्ज चुकाना पड़ेगा

जिंदगी का हिसाब किताब यही देना पड़ेगा। जीवन का कर्ज तुम्हें यही चुकाना पड़ेगा। जिंदगी का हिसाब किताब यही देना पड़ेगा। चाहे कितने भी छुपा लो पापों को। जिंदगी का हिसाब किताब यही देना पड़ेगा।। जिंदगी अब बोझ बनकर रह… Read More

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कविता : सावन के रंग अनेक

बचपन खोकर आई जवानी, साथ में लाई रंग अनेक दिलको दिलसे मिलाने को, देखो आ गई अब ये जवानी अंग-अंग अब मेरा फाड़कता, आता जब सावन का महीना नए-नए जोड़ों को देखकर, मेरा भी दिल खिल उठता। अंदर की इंद्रियों… Read More

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कविता : अंतिम सत्य

बहुत दिनों से मेरी फड़क रही थी आँखे। कोई शुभ संदेश अब शायद मिलने वाला है। फिर एकका एक तुम्हें आज यहाँ पर देखकर। अचंभित हो गया मैं तुम्हें सामने देखकर।। रुलाया है बहुतो को जवानी के दिनों में। कुछ… Read More

dil

व्यंग्य : दिले नादान तुझे हुआ क्या है

मैं शाम के वक्त चौराहे पर आंखे सेंकने और तफरीह के लिये निकला था। कि मुझे आंखे सेंकने के पुराने अनुभवी उस्ताद अच्छे लाल जी मिल गए , जो कि अब” अच्छे वाले सर” के नाम से विख्यात हैं। मुझसे… Read More

radha rani

कविता : मेहबूब के लिए

मेरा मेहबूब आया है जन्नत के इस बाग में। जिसे सजाया है वसुन्धरा ने चाँद और सितारों से । धरा ने भी बिछा दी है सफेद चादर मोतीयों की। और महका के रख दिया है रातरानी ने इस बाग को।।… Read More

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कविता : अनमोल तोफा

दिया है जो तोफा तुमने जिसे बता नहीं सकते। और अपनी खुशी को हम छुपा भी नहीं सकते। मना जो उसने किया है इसे बताने के लिए। करें तो क्या करें अब हम बना रहे दोनों का संतुलन।। बड़े आदर… Read More

shiva

कविता : सावन मास

सावन के मास में वो, शिवजी पर जल ढारत है। बेल पत्ती और फूलों से, पूजा नित्यदिन करती हैं। मनोकामना पूरी कर दो, सावन के इस महीने में। मिलवा दो प्रभु अब मुझे, उस जीवन साथी से। जिसके सपने देख… Read More

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कविता : संघर्षों से ही सफलता

खिले कमल कीचड़ में कैसे, गहन अंधेरा दीप जले। उल्टे बांस बरेली जैसे , मछली उल्टी धार चले। तूफान भरे सागर में वो ही , जीवन नइया चलाता है । कर जिगरा फौलाद का अपना , चिड़िया बाज लड़ाता है… Read More