satiya

कविता : सत्य की खोज़ में

फैलें दुनिया में निर्मल संघ सत्य की खोज़ें जारी रहें अंगुली मालों को बदलने की शक्ति हर बुद्ध के अधीन में आ जावें निकलें हर दिल से सुख विचार शांति दें संसार को सत्संग विहार, मंटप हों जहाँ-तहाँ मिले लोग… Read More

samaj

कविता : शांति की राह में..

तलवार से अगर जीत मिलता तो सबके हाथों में तलवार होते हैं, मनुष्य नहीं, हर जगह हिंस जंतु रहेंगे। छीनना, झपटना, स्वार्थ का रूप है हिंसा कभी भी स्वीकार्य नहीं है ‘विजय’ तलवार व बंदूक से कभी भी नहीं हो… Read More

rat

कविता : चलो.. सीख मिलती है ..चलना कैसे?

चलते हैं लोग दुनिया में कभी तेज, कभी चुस्त कभी सीमाओं के अंदर, कभी सीमाओं को पारकर जो अंधेरे में होते हैं, कोई सहारा नहीं जिसका वे चलते हैं धीरे – धीरे, सब लोग चलते हैं रोशनी में लेकिन बहुत… Read More

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लेख : फीड बैक

आज के दो महत्व्पूर्ण व्यवसाय कि जीवनशैली और उसके परिणाम को भारतीय पृष्ठ भूमि में तुलनात्मक अभिव्यक्ति जो समाज के नौजवान के लिये ख़ासा विस्मयकारी सन्देश देती है दो विपरीत पृष्ट भूमि के व्यक्तियों  कि मित्रता जीवन के प्रारम्भ से… Read More

nari(1)

समीक्षा‌ : सौतेला

अनुपमा अरबिंद कि दूसरी पत्नी जिसे अरबिंद की पहली पत्नी के पुत्र विनम्र से कोई आत्मीय लगाव नहीं है उसका विश्वास है कि विनम्र के रगों में उसके पति का तो लहू प्रवाहित हो रहा है मगर साथ ही साथ… Read More

yaad

समीक्षा‌ : प्यार का सागर

सागर में अक्क्सर तूफ़ान उठा करते है जो कभी कभार नुकसान भी पहुँचा आहत कर देते है जिसकी पीड़ा कदाचित सागर कि नियति प्रतीत होती है जो मन में सदैव के लिये भय पैदा कर देती है ।मगर सागर का… Read More

kalam(1)

समीक्षा‌ : डस्टबिन

साहित्य जीवन मूल्यों कि साध्य साधना है या नहीं ,साहित्य का सामाजिक गति काल से कोई सरोकार है कि नहीं डस्टबिन उसी वास्तविकता कि पृष्टभूमि कि व्याख्या और सच्चाई है ।सजल द्वारा प्रारम्भ में सीड़ी पत्रिका में अपनी कहानियो को… Read More

life(1)

समीक्षा‌ : अपने पराये

जीवन मूल्यों परस्पर भावनाओं और उसकी परिस्थिभूमि परिणाम का सजीव चित्रण कहानी का सशक्त पक्ष है एकाकी प्रज्ञा देवी का पति के तस्वीर से वार्तालाब और सम्पूर्ण जीवन के लम्हों को दमन में समेटे रख उसे ही जीवन का आधार… Read More