yaad

सागर में अक्क्सर तूफ़ान उठा करते है जो कभी कभार नुकसान भी पहुँचा आहत कर देते है जिसकी पीड़ा कदाचित सागर कि नियति
प्रतीत होती है जो मन में सदैव के लिये भय पैदा कर देती है ।मगर सागर का लहरों से पल प्रहर सुबह दिन रात का रिश्ता है ।बिना
लहरों के सागर का अस्तित्व नहीं है सागर में तूफ़ान तो किसी बिकृत बिक्षिप्त अवधारणा के आधार पर जन्म लेता है ।अचेतावस्ता में
पड़ी माँ को चिकित्सकों द्वारा चिकित्सा से यह कहकर इंकार कर् देना कि क़ोई चिकित्सा संभव नहीं है घर ले जाकर सेवा करों लहर
को उसके पिता और भाई के साथ चिकित्सको के व्यवहार जिसके कारण उसके भाई पिता कि दुर्घटना के घावों कि तड़फड़ाहट कि
चिकित्सा न होने के अकस्मात् मृत्यु हो गयी ने चिकित्सकों के प्रति आक्रोशित कर दिया था ।अब माँ ही उसके जीवन का आखिरी
सहारा जो जीवन मृत्यु के मध्य संघर्ष कर रही थी कि चिकित्सा से इनकार करने से लहर हतास उदास जीवन कि आशा विश्वाश कि
गति के लिये पनाह कि तलाश ही कर रही थी कि अचानक लहर को सागर का मिल जाना उसके जीवन के प्रवाह का मार्ग मिल जाता
है ।सागर लहर कि माँ को चिकित्सा हेतु अपने वार्ड में भर्ती करता है वल्कि उसकी चिकित्सा में कोईं कोर कसर नहीं रखता है ।सागर
लहर से स्वयं के माता पिता का असमय साथ छुटने कि वजह और उसके कारण जीवन की दुःस्वरियों और संघर्षों को बताता है लहर
का चिकितकों के प्रति आक्रोशित मन और पिता और भाई के खोने के गम से बाहर निकलता है और वास्तविकता को स्वीकार करने
लगता है और लहर यह मानने लगी है कि दुनियां के हर क्षेत्र् में उजाला अँधेरा दोनों कि संभावना है और चिकित्सकों के प्रति उसके
मन में आदर भाव् और सम्मान का सागर उसके जीवन कि सबसे बड़ी खुशियों का सौगात बन जाता है जिसके साथ
अस्पताल में काम करना लहर को जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य लगता है और खाने के लिये टिफिन मगाने के अनुरोध को लहर
इनकार नहीं कर पाती ऐसा नहीं है  कि लहर डा सागर के एहसानों के बोझ के एहसास करती हो सागर कि व्यवहारिकता में एहसान
बोझ जैसे भाव तर्कहीन महत्वहीन है वह तो सिर्फ कर्तव्य और दायित्व बोध का मानव मूल्य का सागर है जिसमे स्नेह प्रेम करुणा छमा
कि लहर कि नित्य निरंतरता सागर कि वास्तविकता है–::सुनिये डॉ सागर माँ ने आँखे खोल दी है मेरा नाम भी पुकारा माँ ये डॉ
सागर है इन्होंने आपको ठीक किया है सच माँ । ये ख़ुशी के आँसू है आपने ठीक ही कहा था मेरे दुःख के आसुंओं को ख़ुशी के आंशुओं में
बदल देंगे :: इस कहानी में नफरत के नश्तर कि आह से प्रेम के मानवीय संवेदना के स्वर के साम्राज्य के सूर्य के उदय होना प्रसगिगता है
जो किसी घटना विशेष से मूल्यों और संवेदनाओं के समाप्त हो जाने को सिरे से नकारती है।।सामजिक संवेदना  के सागर में पश्चाताप

से परिमाजित लहरों के निरंतर प्रवाह कि संस्कृति को आवाज देती आज कि वास्तविकता सार्थकता प्रदान करने में कहानिकर सशक्त
और सफल हुआ है।

About Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *