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लेख : पर्दे के साथ-साथ संवाद और कहानी के शिल्पी ‘कादर ख़ान’

कादर ख़ान की फिल्मों में उनका अभिनय केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था; वह समाज, परिवार और मानवीय संवेदनाओं का दर्पण भी थे। कुली नंबर 1, जुड़वा, अमर अकबर एंथोनी, मुकद्दर का सिकंदर, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, हीरो नंबर 1,… Read More

लेख : जहाँ हँसी भी करुणा बन जाती है, ‘असरानी’ की याद में

असरानी (पूरा नाम : गोवर्धन असरानी) — एक ऐसा नाम जो अपने आप में हँसी की गूंज है पर उस हँसी के पीछे छिपी हुई गहरी मानवीय संवेदना शायद ही किसी ने उतनी स्पष्टता से देखी हो। हिन्दी सिनेमा के… Read More

व्यंग्य : “जेन जी”

दुनिया हिला दूंगा, सब कुछ जला दूंगा टाइप का एटीट्यूड रखने वाले जेन जी एक तबका नेपाल में सरकार पलट देने से बहुत उत्साहित है। उसी टाइप के एक जेन जी के पास एक हिंदी के अखबार का रिपोर्टर पहुंचा।… Read More

विकसित भारत 2025

भारतवर्ष को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारत सरकार द्वारा देशभर के सभी विद्यालयों में नवाचार हेतु विकसित भारत Buildathon 2025 का ऑनलाइन आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 28 लाख लोग आभासी पटल के माध्यम से शिक्षा मंत्री… Read More

भाषा संवाद से संस्कृति का महासागर है : प्रो. स्वाति पाल

जानकी देवी मेमोरियल महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय की राजभाषा कार्यान्वयन समिति और केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : भाषायी प्रावधान” था। संगोष्ठी में… Read More

मित्रता की परिभाषा : श्री कृष्ण और सुदामा

हिंदी दिवस के अवसर पर प्रस्तुत करते हैं ‘गीतिनाट्य’ मित्रता की परिभाषा : श्री कृष्ण और सुदामा (पात्र : कृष्णा, आदर्श, किशन, रोहित, फैज़ान एवं मोहित) (ध्वनि संपादन : राज, यश) परिकल्पना एवं निर्देशन : श्री आशुतोष श्रीवास्तव  +260

‘हिंदी के विकास की कहानी और रोजगार’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी के हिंदी विभाग द्वारा महाविद्यालय की एन.एस.एस. इकाई के साथ मिलकर हिंदी सप्ताह के उपलक्ष्य में आज राजर्षि सेमिनार हाल में ‘हिंदी के विकास की कहानी और रोजगार’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।… Read More

लेख : हिंदी को किससे लाभ और किससे नुकसान?

हिंदी को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जन-जन में लोकप्रिय बनाने में वर्तमान दौर के हिंदी में लाइब्रेरी संस्करण किताबें लिखने वाले लेखकों और सरकारी प्रयासों का कोई योगदान नहीं है। इन्होंने हिंदी दिवस अभियान का केवल निजी लाभ उठाया है। हिंदी… Read More

लेख : हिंदी राष्ट्रभाषा कब तक?

राष्ट्रभाषा, किसी संप्रभु राष्ट्र केअस्मिता,एकता,अभिव्यक्ति एवं संस्कृति की पहचान होती है। सुदृढ़ तथाअखंड भारत कीकल्पना राष्ट्रभाषा हिन्दी के बिना नहीं की जा सकती। भारत की संविधान सभा ने 14 सितम्बर 1949 को सम्पूर्ण राष्ट्र के लिये हिन्दी की व्यापक स्वीकार्यता,… Read More