गीत : बनारस की गली में

बनारस की गली में  दिखी एक लड़की  देखते ही सीने में आग एक भड़की कमर की लचक से  मुड़ती थी गंगा  दिखती थी भोली सी पहन के लहंगा मिलेगी वो फिर से दाईं आंख फड़की बनारस की गली में… पुजारी… Read More

गीत : आज में जिओ

जो इंसानों को सिर्फ,  काम से ही जानते। उनके नामो से वो, नहीं रखते है मतलब। काम से काम तक, ही रखते है मतलब। ऐसे इंसानों को, आप क्या कहेंगे? जो सिर्फ कामों को, ही सराहते है। और अपनी इंसानियत,… Read More

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फ़िल्म रिव्यू : सिनेमाई पर्दे का खूबसूरत अहसास है झलकी

निर्माता : ब्रम्हानंद एस सिंह और आनंद चैहाण निर्देशक : ब्रम्हानंद एस सिंह और तनवी जैन कलाकार : बोमन ईरानी,तनिष्ठा चटर्जी, संजय सूरी, जौयसेन गुप्ता, दिव्या दत्ता, गोविंद नाम देव,यतिन कर्येकर, अखिलेंद्र मिश्रा, बचन पचेरा, बाल कलाकार आरती झा और… Read More

कविता : शमा जाऊँगी

कभी उन्होंने देखा ही नही,  मुझे उस नजर से। जिसकी मैं उनसे, चाहत रखती हूँ। हूँ खूबसूरत तो क्या, जब उनकी निगाहें। मुझे पर ठहरती नहीं। तो क्या जरूरत ऐसे, रूप और यौवन का ? चंदन सा सुगन्धित मेरा बदन।… Read More

मूवी रिव्यू : राक्खोश

सायकॉलॉजिकल थ्रिलर फ़िल्म है – राक्खोश मशहूर मराठी लेखक नारायण धड़प की कहानी ‘पेशेंट नंबर 302’ पर बनी सायकॉलॉजिकल थ्रिलर फ़िल्म राक्खोश तुम्बाड़ के बाद एक अच्छी हॉरर-ड्रामा फ़िल्म आई है। जो इस जॉनर की सबसे अच्छी हॉरर फिल्मों में… Read More

गीत : दिल की बेचैनी

न दिल मेरा लग रहा,  न मन मेरा लग रहा। एक अजब सी बेचैनी, मेरे दिलमें हो रही है। करु तो क्या करूँ में, दिल की बेचैनी के लिए। यदि हो कोई इलाज तो, मेरे जान तुम बता दो।। कब… Read More

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झारखंड के सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर कब्जा करने के लिए ‘स्प्रिंग थंडर’

छोटा नागपुर 54 करोड़ वर्ष पुराने , हरे-भरे जंगलों और पहाड़ों से घिरे इस प्लेटियू को पूरी दुनिया लोहा, कॉपर, यूरेनियम जैसे मिनरल्स के लिए जानती है। जहाँ लगातार हो रहे खनन के लिए चाहिए जमीन, लेकिन जंगल, पहाड़, नदी… Read More

गीत : देखो दुनियाँ वालो

हा हा कार मचा चारो ओर, देख रही दृश्य ये दुनियां। फिर भी लोगो के दिलो में, जिंदा बची है मानवता।। दूरी बनाकर लोगों की, लोग ही कर रहे है मदद। क्या छोटा क्या बड़ा यहां पर, सबको एक सा… Read More

व्यंग्य : मेहँदी लगा कर रखना

“मैं इसे शोहरत कहूँ, या अपनी रुस्वाई कहूँ, मुझसे पहले उस गली में, मेरे अफसाने गये” अपनी तारीफ सुनने से वंचित और और अति व्यस्त रहने  वाली नये वाले  लिटरैचर विधा की मशहूर भौजी ने खाली बैठे बैठे उकताकर अपनी … Read More