ramraj

लेख : नई चेतना का उदय

साथियों आज कल सत्ता और समय परिवर्तन का दौर चल रहा है। इसी कारण से, में आप से कुछ कहना चाह रहा हूँ। क्या हम सब पहले जैसे भारत का निर्माण करना चाहते है? जिसमे अमन चैन और शांति स्थापित… Read More

kahani

कहानी : खुदा और विसाले सनम

वो लंबे-लंबे कश खींच रहा था मगर उसकी खांसी बदस्तूर जारी थी। सिगरेट न पीने की उसकी आदत सिगरेट से गम गलत करने की उसकी ख्वाहिश पर भारी पड़ रही थी। खांसते खांसते हुये लार उसके चेहरे पर लिपट गयी… Read More

raat

गीत : क्यों बुलाते हो

खनकती चूड़ियाँ तेरी हमें क्यों बुलाती है। खनक पायल की तेरी हमें लुभाती है। हँसती हो जब तुम तो दिल खिल जाता है। और मोहब्बत करने को दिल ललचाता है।। कमर की करधौनी भी तेरी कुछ कहती है। जो प्यास… Read More

naam

कविता : स्वयं की दुनियां

आँखो से क्या कह दिया जिससे मन मचल उठा। दिल मेरा पिघल गया और उसी में मिल गया। जिससे मैं मोहब्बत को उस की तरस गया। और उस से मिलकर प्यार के सागर में डूब गया।। मोहब्बत एक नशा है… Read More

rosni

कविता : मानव-धर्म आबाद रहे

अब तो कर दो प्रभुजी किरपा, मानव-धर्म को सजा सकूँ । धर्म कभी ना कट्टर होवे , मानव-मानव से बचा सकूँ । अब तो कर दो…… पीड़ित भी हूँ ,कुंठित भी हूँ, मन भी मेरा सुलग रहा । मानव-मानव को,… Read More

dhup

कविता : इंसान की जिंदगी

इंसान ही इंसान को लाता है। इंसान ही इंसान को सिखाता है। इंसान ही इंसानियत समझता है। इंसान ही इंसान को मिटाता है।। देखो कही धूप कही छाव है कही ख़ुशी कही गम है। फिर भी इंसान ही क्यों इस… Read More

nirchawar

कविता : खरा उतरु

धरा पर जन्म लेकर किया उपकार जो तुमने। बहुत से पापीयों का किया संग्रहार जो तुमने। इसलिए तो धरा पर बनी है आस्था अब तक। और करते है पूजा-भक्ति लोग हर त्यौहार पर।। पूजते है तुझे हर मजहब के लोग।… Read More

kalpana

कविता : मौसम से याद आई

बदलते मौसम का अंदाज बहुत ही रंग लाता है। फिर पूरे वायु मंडल में घटायओं को बिखेर देते। तभी तो पेड़ पौधे फूल सभी लहरा उठते है। और मंद मंद हवाओं से बिखेर देते है खुशबू को।। नजारा देख ये… Read More

mohabbat

कविता : दिल डोलता है

तेरे हाव भाव देखकर मेरा दिल डोल रहा है। और तेरी आँखो में स्वयं को देख रहा।। इसलिए दिल के अंदर अजीब सी बेचैनी है। समझ में हम लोगों को क्या कुछ आ रहा। या फिर जवानी में ये सब… Read More

sikh

कविता : जीना सीख

हर पल खुलकर जीना है, खुशियां और कहीं ना है, औरों की सुनना छोड़ दे, तू खुदमे एक नगीना है। तुझे ना मिलने का गिला भी है, जो चाहिए था वो मिला भी है, रहता है सुकून से झोपड़ी मे,… Read More