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विश्व हिंदी दिवस
आप सभी को विश्व हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ… +100
व्यंग्य : सब चंगा सी
हाल के दिनों में क्रिकेट की दुनिया ने काफी उथल- पुथल देखी।अब क्रिकेट में सिर्फ एक ही चीज स्थायी है वह है भारत और पाकिस्तान के मुकाबले में पाकिस्तान की हार। भले ही मैच किसी भी फार्मेट और किसी भी… Read More
संगोष्ठी : भारतीय समाज, प्रगतिशील आंदोलन और अमरकांत
प्रसिद्ध कथाकार अमरकांत की जन्मशती के अवसर पर आज दिनांक 10 नवंबर 2025 को उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी के हिंदी विभाग द्वारा ‘राजर्षि सेमिनार हाल’ में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी दो सत्रों में संपन्न हुई।… Read More
व्यंग्य : “जेन जी”
दुनिया हिला दूंगा, सब कुछ जला दूंगा टाइप का एटीट्यूड रखने वाले जेन जी एक तबका नेपाल में सरकार पलट देने से बहुत उत्साहित है। उसी टाइप के एक जेन जी के पास एक हिंदी के अखबार का रिपोर्टर पहुंचा।… Read More
भाषा संवाद से संस्कृति का महासागर है : प्रो. स्वाति पाल
जानकी देवी मेमोरियल महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय की राजभाषा कार्यान्वयन समिति और केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : भाषायी प्रावधान” था। संगोष्ठी में… Read More
मित्रता की परिभाषा : श्री कृष्ण और सुदामा
हिंदी दिवस के अवसर पर प्रस्तुत करते हैं ‘गीतिनाट्य’ मित्रता की परिभाषा : श्री कृष्ण और सुदामा (पात्र : कृष्णा, आदर्श, किशन, रोहित, फैज़ान एवं मोहित) (ध्वनि संपादन : राज, यश) परिकल्पना एवं निर्देशन : श्री आशुतोष श्रीवास्तव +260
लेख : हिंदी को किससे लाभ और किससे नुकसान?
हिंदी को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जन-जन में लोकप्रिय बनाने में वर्तमान दौर के हिंदी में लाइब्रेरी संस्करण किताबें लिखने वाले लेखकों और सरकारी प्रयासों का कोई योगदान नहीं है। इन्होंने हिंदी दिवस अभियान का केवल निजी लाभ उठाया है। हिंदी… Read More
लेख : हिंदी राष्ट्रभाषा कब तक?
राष्ट्रभाषा, किसी संप्रभु राष्ट्र केअस्मिता,एकता,अभिव्यक्ति एवं संस्कृति की पहचान होती है। सुदृढ़ तथाअखंड भारत कीकल्पना राष्ट्रभाषा हिन्दी के बिना नहीं की जा सकती। भारत की संविधान सभा ने 14 सितम्बर 1949 को सम्पूर्ण राष्ट्र के लिये हिन्दी की व्यापक स्वीकार्यता,… Read More
लेख : विश्व भाषा के रूप में हिंदी के बढ़ते कदम
एक हिंदी शिक्षक के रूप में मैं यह अनुभव करती हूँ कि हिंदी अब केवल भारत की भाषा नहीं रही, बल्कि यह धीरे-धीरे विश्व भाषा बनने की ओर अग्रसर है। भाषा किसी समाज की आत्मा होती है, और जब वह… Read More
