जान ले रहा है ‘कोरोना’, अब हिंदुस्तान में। अब संभल कर रहो, अपने-अपने घरों में। कैसी बीमारी ये आई, जान पर आफत आई। न कोई समझे-न ही जाने, बस हाँ में हाँ सबकी मिलानी। कैसे ले रही है, जान इंसानों… Read More
जान ले रहा है ‘कोरोना’, अब हिंदुस्तान में। अब संभल कर रहो, अपने-अपने घरों में। कैसी बीमारी ये आई, जान पर आफत आई। न कोई समझे-न ही जाने, बस हाँ में हाँ सबकी मिलानी। कैसे ले रही है, जान इंसानों… Read More
मुसीबत का पहाड़, कितना भी बड़ा हो। पर मन का विश्वास, उसे भेद देता है। मुसीबतों के पहाड़ों को, ढह देता है। और अपने कर्म पर, जो भरोसा रखता है।। सांसारिक उलझनों में, उलझा रहने वाला इंसान। यदि… Read More
स्वार्थपरायण होते आयोजक संग प्रचारप्रिय प्रायोजक भव्य मंच हो या कोई कक्ष उपस्थित होते सभी चक्ष सम्मुख रखकर अणुभाष करते केवल द्विअर्थी संभाष करता आरंभ उत्साही उद्घोषक समापन हेतु होता परितोषक करते केवल शब्दों का शोर चाहे वृद्ध हो या… Read More
दिल करता है, जिंदगी तुझे दे दूँ। जिंदगी की सारी खुशी तुझे दे दूँ। दे दे अगर तू मुझे, भरोसा अपने साथ का। तो यकीन कर मेरा, साँसे दे दूँगा तुझे अपनी।। अब तक दिया है साथ, आगे भी उम्मीद… Read More
तुम्हें कैसे रंग लगाए, और कैसे होली मनाए? दिल कहता है होली, एकदूजे के दिलों में खेलो। क्योंकि बहार का रंग तो, पानी से धूल जाता है। पर दिल का रंग दिल पर, सदा के लिए चढ़ा जाता है।। प्रेम… Read More
आओ हम सब, मिलकर मनाएं होली। अपनों को स्नेहप्यार का, रंग लगाये हम। चारो ओर होली का रंग, और अपने संग है। तो क्यों न एकदूजे को, रंग लगाए हम। आओ मिलकर मनाये, रंगो की होली हम।। राधा का रंग… Read More
*क्योंकि मैं सत्य हूं* मैं कल भी अकेला था आज भी अकेला हूं और संघर्ष पथ पर हमेशा अकेला ही रहूंगा मैं किसी धर्म का नहीं मैं किसी दल का नहीं सम्मुख आने से मेरे भयभीत होते सभी जानते हैं… Read More
तेरी तस्वीर को, सीने से लगा रखा है। और तुझे अपने, दिल में बसा रखा है। इसलिए तो आंखे, देखने को तरसती है।। दिल तेरा है, पर हक तो मेरा है। क्योंकि तुमने मुझे, अपना दिल जो दिया है। मेरा… Read More
जन्मी तो अलग तरह से सूचना दी गई ताकि सब जान सकें कि घर में आ गई है कुलच्छिनी मातम मना घर भर में पूरे पाँच साल दोयम दर्जे के स्कूल जाती रही बड़ी होकर समझदार हुई तो इसी में… Read More
मान मिले सम्मान मिले, नारी को उच्च स्थान मिले। जितनी सेवा भक्ति वो करती। उस से ज्यादा सम्मान मिले। यही भावना हम भाते, की उसको यथा स्थान मिले।। कितना कुछ वो, दिनरात करती है। घर बाहर का भी देखा करती… Read More