कविता : संभल कर रहो

जान ले रहा है ‘कोरोना’, अब हिंदुस्तान में। अब संभल कर रहो, अपने-अपने घरों में। कैसी बीमारी ये आई, जान पर आफत आई। न कोई समझे-न ही जाने, बस हाँ में हाँ सबकी मिलानी। कैसे ले रही है, जान इंसानों… Read More

कविता : विश्वास

मुसीबत का पहाड़,  कितना भी बड़ा हो। पर मन का विश्वास, उसे भेद देता है। मुसीबतों के पहाड़ों को, ढह देता है। और अपने कर्म पर, जो भरोसा रखता है।। सांसारिक उलझनों में,      उलझा रहने वाला इंसान। यदि… Read More

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कविता : कवि सम्मेलन

स्वार्थपरायण होते आयोजक संग प्रचारप्रिय प्रायोजक भव्य मंच हो या कोई कक्ष उपस्थित होते सभी चक्ष सम्मुख रखकर अणुभाष करते केवल द्विअर्थी संभाष करता आरंभ उत्साही उद्घोषक समापन हेतु होता परितोषक करते केवल शब्दों का शोर चाहे वृद्ध हो या… Read More

कविता : खुशियां

दिल करता है, जिंदगी तुझे दे दूँ। जिंदगी की सारी खुशी तुझे दे दूँ। दे दे अगर तू मुझे, भरोसा अपने साथ का। तो यकीन कर मेरा, साँसे दे दूँगा तुझे अपनी।। अब तक दिया है साथ, आगे भी उम्मीद… Read More

कविता : होली का रंग

तुम्हें कैसे रंग लगाए, और कैसे होली मनाए? दिल कहता है होली, एकदूजे के दिलों में खेलो। क्योंकि बहार का रंग तो, पानी से धूल जाता है। पर दिल का रंग दिल पर, सदा के लिए चढ़ा जाता है।। प्रेम… Read More

कविता : होली का त्यौहार

आओ हम सब, मिलकर मनाएं होली। अपनों को स्नेहप्यार का,  रंग लगाये हम। चारो ओर होली का रंग,  और अपने संग है। तो क्यों न एकदूजे को, रंग लगाए हम। आओ मिलकर मनाये, रंगो की होली हम।। राधा का रंग… Read More

कविता : क्यूंकि मैं सत्य हूँ

*क्योंकि मैं सत्य हूं* मैं कल भी अकेला था आज भी अकेला हूं और संघर्ष पथ पर हमेशा अकेला ही रहूंगा मैं किसी धर्म का नहीं  मैं किसी दल का नहीं सम्मुख आने से मेरे भयभीत होते सभी जानते हैं… Read More

कविता : दिल तेरा है तो

तेरी तस्वीर को,  सीने से लगा रखा है। और तुझे अपने, दिल में बसा रखा है। इसलिए तो आंखे, देखने को तरसती है।। दिल तेरा है, पर हक तो मेरा है। क्योंकि तुमने मुझे, अपना दिल जो दिया है। मेरा… Read More

कविता : हे स्त्री!

जन्मी तो अलग तरह से सूचना दी गई ताकि सब जान सकें कि घर में आ गई है कुलच्छिनी मातम मना घर भर में पूरे पाँच साल दोयम दर्जे के स्कूल जाती रही बड़ी होकर समझदार हुई तो इसी में… Read More

कविता : नारी को सम्मान दो

मान मिले सम्मान मिले,  नारी को उच्च स्थान मिले। जितनी सेवा भक्ति वो करती। उस से ज्यादा सम्मान मिले। यही भावना हम भाते, की उसको यथा स्थान मिले।। कितना कुछ वो,  दिनरात करती है। घर बाहर का भी देखा करती… Read More