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कविता: आँखें

आज की दुनिया में बहुत कम लोग अपनी आँखों से देख पाते हैं कई लोग, चेस्मा के बगैर बाहर कदम भी नहीं ले पाते हैं, कुछ लोग भविष्य को देखने में सक्षम होते हैं, दूसरे के अंतरंग में जाना, यथार्थ… Read More

akh

कविता : आँखो का खेल

मिलाकर आँखे किसी से लुभा उनको लेते है। दिल की गैहरीयों में बसा उनको लेते है। और दिलकी धड़कनो में शमा उनको लेते है। फिर दो आत्माओं का मिलन करा देते है।। मोहब्बत करने वालो का निराला अंदाज होता है।… Read More

bhagwan

कविया :श्रीराम श्रीकृष्ण मिले

चलते चलते मुझे श्रीराम मिल गये । चलते चलते मुझे श्रीकृष्ण मिल गये । बातों ही बातों में वो पूछने लगे। क्या करते हो तुम? मैने कहाँ की मैं एक कवि हूँ जी। सुनकर दोनो जन जोर से हंस पड़े।… Read More

naam

कविता : स्वयं की दुनियां

आँखो से क्या कह दिया जिससे मन मचल उठा। दिल मेरा पिघल गया और उसी में मिल गया। जिससे मैं मोहब्बत को उस की तरस गया। और उस से मिलकर प्यार के सागर में डूब गया।। मोहब्बत एक नशा है… Read More

rosni

कविता : मानव-धर्म आबाद रहे

अब तो कर दो प्रभुजी किरपा, मानव-धर्म को सजा सकूँ । धर्म कभी ना कट्टर होवे , मानव-मानव से बचा सकूँ । अब तो कर दो…… पीड़ित भी हूँ ,कुंठित भी हूँ, मन भी मेरा सुलग रहा । मानव-मानव को,… Read More

dhup

कविता : इंसान की जिंदगी

इंसान ही इंसान को लाता है। इंसान ही इंसान को सिखाता है। इंसान ही इंसानियत समझता है। इंसान ही इंसान को मिटाता है।। देखो कही धूप कही छाव है कही ख़ुशी कही गम है। फिर भी इंसान ही क्यों इस… Read More

nirchawar

कविता : खरा उतरु

धरा पर जन्म लेकर किया उपकार जो तुमने। बहुत से पापीयों का किया संग्रहार जो तुमने। इसलिए तो धरा पर बनी है आस्था अब तक। और करते है पूजा-भक्ति लोग हर त्यौहार पर।। पूजते है तुझे हर मजहब के लोग।… Read More

kalpana

कविता : मौसम से याद आई

बदलते मौसम का अंदाज बहुत ही रंग लाता है। फिर पूरे वायु मंडल में घटायओं को बिखेर देते। तभी तो पेड़ पौधे फूल सभी लहरा उठते है। और मंद मंद हवाओं से बिखेर देते है खुशबू को।। नजारा देख ये… Read More

mohabbat

कविता : दिल डोलता है

तेरे हाव भाव देखकर मेरा दिल डोल रहा है। और तेरी आँखो में स्वयं को देख रहा।। इसलिए दिल के अंदर अजीब सी बेचैनी है। समझ में हम लोगों को क्या कुछ आ रहा। या फिर जवानी में ये सब… Read More

sikh

कविता : जीना सीख

हर पल खुलकर जीना है, खुशियां और कहीं ना है, औरों की सुनना छोड़ दे, तू खुदमे एक नगीना है। तुझे ना मिलने का गिला भी है, जो चाहिए था वो मिला भी है, रहता है सुकून से झोपड़ी मे,… Read More