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कविता : नारी और श्रृंगार

नारी और श्रृंगार देखकर मानव का दिल डोले। सुंदर से बदन पर जब वो पहनी हो ये चीजें। फिर हँसते हुये चेहरे से मानो झड़ रहे हो फूल। इसलिए सब कहते है नारी तू है बहुत अनमोल। माथे पर बिंदी… Read More

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कविता : बादल छा गये

देखो बादल छा रहे बरसने के लिए। बादल गरजने लगे सतर्क करने ले लिए। मेघ मल्हार गाने लगे अब वर्षा के लिए। भूमि बहुत प्यासी है पानी के लिए।। आस लगाये पानी की बैठे नदी और तलाब। कब होगी अब… Read More

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कविता : बाग और फूल

बैठे बैठे बाग में देखा कुछ ऐसा। जैसे सूरज की किरणे धीरे धीरे फैलती है। वैसे ही फूल भी धीरे धीरे खिल उठते। प्रकृति का ये नियम बड़ा रामणी होता है।। फूलो की सुंदरता महक से खिल उठा सारा गुल्स्थान।… Read More

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कविता : कला बिक रही है

दिन रात उजालों में रहने वाले क्या जानेगें अंधेरा क्या होता है। बस खनती पयाल की झंकार और गीतों की पुकार जानते है। चंद पैसों की खातिर ही सही ये कलाकार खुशियां बेचते है। जो अमीरजादो की शाम को हर… Read More

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कहानी : नेपोकिडनी

अचानक फेसबुक पर मुझे टैग की गयी पोस्ट्स पर मेरी नजर पड़ी तो हैरान रह गया। सयानी नाम के एक काव्य संकलन की चर्चा महाकवि की वाल पर थी । साहित्य में एक नेपो किड का आगमन हो चुका था… Read More

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कहानी : रिश्ते का सूत्र

पिछले दिनों मेरा सबसे प्यारा दोस्त कनक मुझसे मिलने आया। उसके चेहरे की उदासी देख मैं समझ गया कि कनक कुछ परेशान सा है। मैंने पूछा भी, तो टाल गया। मगर मैं भी कहां छोड़ने वाला। वैसे भी वो मुझसे… Read More

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कविता : तुम्हारे बिन

इस दफ़ा मैं हूँ तुम्हारे बिन, ये सुबह यू ही बीत गई तुम्हारे बिन। कहीं से कोई परेशान करने नही आया, फिर जाने क्यों खुश नही मैं, तुम्हारे बिन। आज कमबख्त दिन नही कट रहा तुम्हारे बिन, शाम शायद बेरुखी… Read More

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कविता : बस एक ही

बरखा की बूँदों के आगमन के साथ ही जन्मदिन का आना झरते हुए फूलों का डालियों से टूटकर राह में बिछा जाना हवा के खुशबूदार झोंके से भरती है तन में सिहरन नहायी प्रकृति के केश से झरती बूंदों की… Read More

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कविता : दिलकी बातें दिल जाने

मोहब्बत जो करते है वो अंजाम से नहीं डरते। क्योकिं ये पग पग पर हमारा इंतहान लेती है।। क्या दिलमें तेरे उमंगे है दिलको छेड़ने के लिए। क्या दिलमें तेरे तरंगे है दिलरुबा को प्रेमरस के लिए। तभी तो मधुर… Read More

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कहानी : अपनापन

पिछले दिनों कवि/साहित्यकार रिशु अपने मित्र लवलेश के घर गया। यूँ तो दोनों का एक दूसरे के घर काफी पहले से आना जाना था। मगर लवलेश की शादी में रिशु अपने एक पूर्व निर्धारित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में जाने की… Read More