तनहाई का आलम, बड़ा ही सुहाना था… कुछ उनकी याद थी, बाकी बारिश का जमाना था। 00
तनहाई का आलम, बड़ा ही सुहाना था… कुछ उनकी याद थी, बाकी बारिश का जमाना था। 00
आज के दो महत्व्पूर्ण व्यवसाय कि जीवनशैली और उसके परिणाम को भारतीय पृष्ठ भूमि में तुलनात्मक अभिव्यक्ति जो समाज के नौजवान के लिये ख़ासा विस्मयकारी सन्देश देती है दो विपरीत पृष्ट भूमि के व्यक्तियों कि मित्रता जीवन के प्रारम्भ से… Read More
अनुपमा अरबिंद कि दूसरी पत्नी जिसे अरबिंद की पहली पत्नी के पुत्र विनम्र से कोई आत्मीय लगाव नहीं है उसका विश्वास है कि विनम्र के रगों में उसके पति का तो लहू प्रवाहित हो रहा है मगर साथ ही साथ… Read More
सागर में अक्क्सर तूफ़ान उठा करते है जो कभी कभार नुकसान भी पहुँचा आहत कर देते है जिसकी पीड़ा कदाचित सागर कि नियति प्रतीत होती है जो मन में सदैव के लिये भय पैदा कर देती है ।मगर सागर का… Read More
साहित्य जीवन मूल्यों कि साध्य साधना है या नहीं ,साहित्य का सामाजिक गति काल से कोई सरोकार है कि नहीं डस्टबिन उसी वास्तविकता कि पृष्टभूमि कि व्याख्या और सच्चाई है ।सजल द्वारा प्रारम्भ में सीड़ी पत्रिका में अपनी कहानियो को… Read More
जीवन मूल्यों परस्पर भावनाओं और उसकी परिस्थिभूमि परिणाम का सजीव चित्रण कहानी का सशक्त पक्ष है एकाकी प्रज्ञा देवी का पति के तस्वीर से वार्तालाब और सम्पूर्ण जीवन के लम्हों को दमन में समेटे रख उसे ही जीवन का आधार… Read More
वाराणसी( उत्तर प्रदेश)। `पीताम्बर` की रचना `एहसास रिश्तों का` आज के परिपेक्ष्य में साहित्य और विषय वस्तु में सर्वोत्तम श्रेष्ठतम खण्ड काव्य हैl यह रचना भारतीय हिंदी साहित्य के महाकवि निराला रामधारी सिंह,दिनकर को जीवन्त करती हैl निश्चित तौर पर… Read More
ज़िन्दगी भी गूगल सर्च की तरह है, जितना सवाल पूछते जाओगे, समय आने पर, वह सभीका उत्तर देती जाएगी. 00
संसार-सागर सिर्फ समय-सराय , परमात्मा से बिछड़, आत्मा यहां आय। पार्थिव तत्वों को उसने ही गूँथकर, घररूपी नश्वर शरीर बनाया । हाथ खुले रखकर है जाना , फिर क्यों सोचे..? कि क्या तूने कमाया ..? पाने से ज्यादा तू खोकर… Read More
संबंधों की सब हरियाली सूखी जीवन हो जैसे इक बलि वेदी गलना ,ढहना,तिल -तिल मरना जीवन ने चुना मृत्यु का गहना उम्मीद न रही कोई भी बाकी अब कौन सा रंग बचा साथी मन मंदिर की मूरत खंडित की निरपराध… Read More