karwachuth

टकटकी नयनों को और मन को हैं विश्वास
बेसबब सा छत पर कोई हो रहा बेकरार
आज सुना आसमां भी ले रहा इम्तिहान हैं
छुपा के अपनें अंक में,करवा रहा इंतजार,

चाँद जैसे बादलों के बीच कहीं खो गया
सितारों संग आसमां के अंक में सो गया
थक गया आँखें किसी की राह तकतें चाँद की
अरमान उसके दिल की ये चाँद जैसे धो गया,

करके सोलह श्रृंगार उपवास भी रखा हैं कोई
देर तक मिलनें से उससे प्रवास भी रखा हैं कोई
चाँद अपनें चाँदनी सँग ले रहा इम्तिहान हैं
होगा मिलन इस चाँदनी में,विश्वास भी रखा हैं कोई,

देव पूजा सी सजी थालियाँ बेचैन हैं
अर्चना की रोली अक्षत फूल कलियाँ बेचैन हैं
माँग की सिंदूर,सुर्ख मेहदियाँ बेचैन हैं
लग जाऊँ होठों से तेरे,प्यालियाँ बेचैन हैं,

रात भी ये प्यार को ही जीतने की रात हैं
प्यार से जीता हैं कौन,ये देखने की रात हैं
प्यार के आगे झुका हैं चक्र भी घनश्याम का
फिर प्यार से बढ़ कर हैं क्या?ये जानने कि रात हैं

प्यार से बड़ा ना कोई पुण्य कोई प्रताप हैं
प्यार के आगे सभी बेबस सभी लाचार हैं
प्यार के छीटों में शक्ति हैं बड़ी पावस से भी
भींग जाए मरु भी तो हो जाये गुलजार हैं,

बन जाए दुनियाँ सभी प्यार का दुश्मन भलें
कुछ कर नहीं सकता कोई होकर रहबर भले
प्यार ने अकेले ही जीता जंग दुनियाँ में सभी
बुला ही लेगा चाँद को,जो छुप रहा रहकर भलें,

हार कर आकाश पर,ऐ चाँद देखों आ गया
दो बेचैन दिल का मुहब्बत चाह देखों आ गया
अथाह हैं गहराई इसकी चाँद तेरी चाँदनी से
ये समर्पण स्नेह का अमर साथ देखों पा गया,

चाँद तेरी चाँदनी में चाह दुनियाँ देख ले
तेरे मेरें मिलन की रात दुनियाँ देख ले
छत नहीं आकाश पर अमिट छाप चाह की
करवाँ चौथ पर्व पर यह बात दुनियाँ देख ले ।।

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