hindustan

आओ ! मिलकर, हम चलो बनाएं ,
स्वर्ग से सुंदर, हिन्दुस्थान।
विविध-विविध संस्कार भले हो,
विश्व में हो, बस एक पहचान।
आओ ! मिलकर ……

ना बंटवारा,कभी चाहा हमने,
कभी ना चाही,वो दासता ।
विश्वधरा से सब अपनाया ,
फिर भी जग है पहचानता ।
संस्कृतियों के मंथन से ही,
देश बनेगा और महान ।
आओ ! मिलकर, हम चलो बनाएं ,
स्वर्ग से सुंदर हिन्दुस्थान।
विविध-विविध संस्कार भले हो,
विश्व में हो ,बस एक पहचान।
आओ ! मिलकर ……

धर्मगुरु से विश्वगुरु तक ,
‘भरत ‘ परंपरा मिसाल बनी ।
भारत भूमि से सब कुछ पनपा ,
नमन तुझे धन-धन जननी ।
भारत वो सोने की चिड़िया ,
जिसका गूंजे आज भी गान।
आओ ! मिलकर, हम चलो बनाएं ,
स्वर्ग से सुंदर,हिन्दुस्थान।
विविध-विविध संस्कार भले हो,
विश्व में हो ,बस एक पहचान।
आओ ! मिलकर ……

‘गौतम’ ,’जिन’,’गाँधी’ की भूमि ,
सत्य-अहिंसा कण-कण में।
देख जिन्हें संसार हो गर्वित,
मिसाल बने हम जग-जन में ।
मर्यादा पुरूषोत्तम से हम,
आदर्श बनाएं ,गाथा-गुणगान ।
आओ ! मिलकर, हम चलो बनाएं ,
स्वर्ग से सुंदर हिन्दुस्थान।
विविध-विविध संस्कार भले हो,
विश्व में हो, बस एक पहचान।
आओ ! मिलकर ……

हिंसा-गूंज, क्यों आर्तनाद वो ?
चित्कार बने जो करुण पुकार।
सब मिलकर वो भविष्य गढ़ ले ,
जन-जन हो जैसे परिवार ।
अनेक भले ,पर एक बने हम,
संगठित हो पाएं सम्मान ।
आओ ! मिलकर, हम चलो बनाएं ,
स्वर्ग से सुंदर हिन्दुस्थान।
विविध-विविध संस्कार भले हो,
विश्व में हो बस एक पहचान।
आओ ! मिलकर ……

ठेठ सनातन सृष्टि लेकर ,
आज पहुंच है मंगल तक ।
गीता , ग्रन्थ , कुरान अपनाकर ,
आध्यात्म बना इस मंतव तक। ‘अजस्र ‘ फूलों की माला गूंथे,
फूल-फूल सब महक तमाम ।
आओ ! मिलकर, हम चलो बनाएं ,
स्वर्ग से सुंदर हिन्दुस्थान।
विविध-विविध संस्कार भले हो,
विश्व में हो, बस एक पहचान।
आओ ! मिलकर ……

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