कविता : चूमना क्या है?

अधरों को अधर से सटा कर प्रिय चूम लेना ये चुंबन कतई ना हुआ वासना की झुलसती हुई आग में होंठ अपने जलाना भी चुंबन नहीं अधरों पर गड़े हों अधर ज़ोर से हाथ नितंब व छाती दबाते रहें प्यास… Read More

कविता : दो वक़्त की रोटी

ये “दो वक़्त की रोटी” है बड़े काम की भैया, रख लो इसे संभाल के भैया। जिसको मिल जाए उसकी तो बल्ले-बल्ले, ना मिले तो बुरा हाल है भैया। सोचो गर दुनिया मेँ खाना जरूरी न होता, तो शायद किसी… Read More

कविता : क्या स्तर है?

गिरती हुई अर्थव्यवस्था,  को कौन बचाएगा। मरते हुए इंसान को, कौन बचाएगा। यदि ऐसा ही चलता रहा, तो देश डूब जाएगा। और इसका श्रेय फिर, किस को देओगे।। जब जब भी अच्छा हुआ, वो मेरी किस्मत थी। अब बढ़ रही… Read More

कविता : आदर्श परिवार

जोड़ जोड़कर तिनका, पहुंचे है यहां तक। अब में कैसे खर्च करे, बिना बजह के हम। जहां पड़े जरूरत, करो दबाकर तुम खर्च। जोड़ जोडक़र ……। रहता हूँ मैं खिलाप, फिजूल खर्च के प्रति। पर कभी न में हारता, मेहनत… Read More

कविता : इंतजार है

तुझे देखने का हर रोज़,   हम इंतजार करते हैं। दिल से हम तुम्हें बहुत, प्यार करते है। कल का दिन तुझे देखे, बिना निकल गया। अब आज हमे  तेरा, बहुत इंतजार है ।। आंखों से तीर छोड़ने की, जो तेरी… Read More

कविता : आज फिर याद आए

मेरे दिल मे बसे हो तुम, तो में कैसे तुम्हें भूले। उदासी के दिनों की तुम, मेरी हम दर्द थी तुम। इसलिए तो तुम मुझे, बहुत याद आते हो। मगर अब तुम मुझे, शायद भूल गए थे।। आज फिर से… Read More

कविता : प्यार का परिणाम

प्यार को प्यार से देखोगे,   तो प्यार पाओगे। दिल में मुरझाए हुए, फूल भी खिल जाएंगे। जिस को भीड़ में, ढूंढ रहे है तेरी निगाहें। मेरा दावा है कि वो, तुझे मिल जाएगा।। निगाहों का निगाहों से,  जो तुम खेल… Read More

कविता : मेरी माँ मेरा आधार

कितना मुझे हैरान, परेशान किया लोगों। पर मकसद में वो, कामयाब हो नहीं । क्योंकि है माँ का आशीर्वाद, जो मेरे सिर पर। इसलिए तो बड़ी से बड़ी, मुश्किलों से निकल जाता हूँ।। धन दौलत से ज्यादा, मुझे मेरी माँ… Read More

कविता : शब्दों का महत्व

शब्दों के प्रयोग से  महकता है आपका जीवन। शब्दो के प्रयोग से ही बनते हैं प्रशंसक। शब्दों के उपयोग से समझ आते है पढ़े लिखे। शब्दों और वाणी से बना सकते हो माहौल। शब्दों के बिना निराधार है आपका मनुष्य… Read More

कविता : मेरा मन

ना जाने कहां पड़ा है कहीं रखकर भूल गई हूं शायद एक मन था जो मेरे पास हुआ करता था जाने कहां गया मिलता ही नहीं   वैसे… मैंने कोशिश भी कहां की उसे ढूंढने की गृहस्थी की जिम्मेारियों से… Read More