महान विभूति : महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ,जब मैं स्कूल में था।प्रताप को विशेष रूप से जानने-बुझने की जिज्ञासा जागृत हुई।मैं स्तब्ध था क्योंकि अभी तक राष्ट्रनायकों से ज्यादा आक्रमणकारियों के विषय में पढ़ने को मिला था ।बालपन में ही यह… Read More

गीत

हर राम का जटिल जीवन पथ होगा  जब पिता भार्या भक्त दशरथ होगा  करके ज़ुल्म करता है वो इबादत कहो फिर कैसे पूर्ण मनोरथ होगा नींद आयेगी तुझे भी सुकून भरी जब तू भी पसीने से लथपथ होगा कृष्ण का… Read More

व्यंग्य : कागज़ नहीं दिखाएँगे

युग के युवा,मत देख दाएं और बाएं और पीछे ,झाँक मत बगलें न अपनी आँख कर नीचे,अगर कुछ देखना है  देख अपने वे वृषभ कंधे,जिन्हें देता निमंत्रण सामने तेरे पड़ा, युग का जुआ “ युग का जुआ युवाओं को अपने… Read More

कविता : मेरी माँ मेरा आधार

कितना मुझे हैरान, परेशान किया लोगों। पर मकसद में वो, कामयाब हो नहीं । क्योंकि है माँ का आशीर्वाद, जो मेरे सिर पर। इसलिए तो बड़ी से बड़ी, मुश्किलों से निकल जाता हूँ।। धन दौलत से ज्यादा, मुझे मेरी माँ… Read More

कविता : शब्दों का महत्व

शब्दों के प्रयोग से  महकता है आपका जीवन। शब्दो के प्रयोग से ही बनते हैं प्रशंसक। शब्दों के उपयोग से समझ आते है पढ़े लिखे। शब्दों और वाणी से बना सकते हो माहौल। शब्दों के बिना निराधार है आपका मनुष्य… Read More

गीत : हमराज बन गए

तुमने मुझे क्यों चुना, मोहब्बत करने के लिए। मुझमें तुम्हें क्या, अच्छा और सच्चा लगा। मैनें तो तुमसे कभी, निगाहें मिलाई ही नहीं। फिर भी तुमने अपना दिल, मेरे को क्यों दिया।। दिल के झरोखों से क्या तुम्हें कोई तरंग… Read More

ग़ज़ल : इंसानों की एक जमात कभी तो होगी

बेबसी की आख़िरी रात कभी तो होगी रहमतों की बरसात कभी तो होगी जो खो गया था कभी राह-ए-सफ़र में उस राही से मुलाक़ात कभी तो होगी हो मुझ पर निगाह-ए-करम तेरी इबादत में ऐसी बात कभी तो होगी आऊंगा… Read More

ग़ज़ल : मुझे भी फिर से उसी बेवफा पर प्यार आया है

आज लौटकर मिलने मुझसे मेरा यार आया है शायद फिर से जीवन में उसके अंध्यार आया है बचकर रहना अबकी बार चुनाव के मौसम में मीठी बातों से लुभाने तुम्हें रंगासियार आया है बहुत प्यार करता है मुझसे मेरा पड़ोसी… Read More

व्यंग्य : मेरा वो मतलब नहीं था

“जामे जितनी बुद्धि है,तितनो देत बताय वाको बुरा ना मानिए,और कहाँ से लाय” देश में धरना -प्रदर्शन से विचलित ,और अपनी उदासीन टीआरपी से खिन्न फिल्म इंडस्ट्री के कुछ अति उत्साही लोगों ने सोचा कि तीन घण्टे की फिल्म में… Read More

ग़ज़ल : मानव ही मानवता को शर्मसार करता है

मानव ही मानवता को शर्मसार करता है  सांप डसने से क्या कभी इंकार करता है  उसको भी सज़ा दो गुनहगार तो वह भी है जो ज़ुबां और आंखों से बलात्कार करता है तू ग़ैर है मत देख मेरी बर्बादी के… Read More