कविता : यादों के लिए

तेरी यादों को अभी तक, दिल से लगाये बैठा हूँ। की तुम लौटकर आओगे। मेरे लिए नहीं सही तो, परायें के लिए ही सही। तभी आप की धरोहर, आप को सौप देंगे। और इस मतलबी दुनियाँ से, कुछ कहे बिना… Read More

गीत : मैं तो हूं केवल अक्षर

मैं तो हूं केवल अक्षर  तुम चाहो शब्दकोश बना दो  लगता वीराना मुझको अब तो ये सारा शहर याद तू आये मुझको हर दिन आठों पहर जब चाहे छू ले साहिल वो लहर सरफ़रोश बना दो अगर दे साथ तू… Read More

कविता : उड़ने के लिए

ला दो मुझे भी वो पंख उड़ने के लिए, पंख पसारकर हर ऊँचाई। पंखों के बिन उड़ना कैसा? उम्मीद के बिन ठहरना कैसा? उम्मीद की कली है खिलने दो न मुझमें, पंख पसारकर उड़ने दो न मुझे! आएगा एक दिन… Read More

कविता : चलती हूँ कुछ दूर

चलती हूँ कुछ दूर, पाँव रुक जाते है। मंजिल पर पहुँचने से पहले, हालात बिगड़ जाते है। बहुतों को देखा है, लिखते अपनी कहानी। हम जब लिखते है, हमारे हाथ रुक जाते है। बैठें थे जब लिखनें वो ऊपरवाले, क़िस्मत… Read More

कविता : भारत में

भारत में पूर्ण सत्य  कोई नहीं लिखता  अगर कभी किसी ने लिख दिया तो कहीं भी उसका प्रकाशन नहीं दिखता यदि पूर्ण सत्य को प्रकाशित करने की  हो गई किसी की हिम्मत  तो लोगों से बर्दाश्त नहीं होता और फिर… Read More

कविता : वो भाग जाते हैं

लगाकर आग दिल में वो,  अक्सर भाग जाते है। कह कर अपनी बात, अक्सर भाग जाते है। बिना जवाब के भी, क्या वो समझ जाते है। तभी तो बार बार आकर, मुझसे कुछ कहते है।। उन्हें प्यार हो गया है।… Read More

कविता : श्रोता बना आशिक

मिले हम अपनी कविता,  गीतों के माध्यम से तुम्हें। परन्तु ये तो कुछ, और ही हो गया। पढ़ते पढ़ते मेरी गीतों के, तुम प्रशंसक बन गये। और दिल ही दिल में, हमें चाहाने लगे। और अपने से, हमें लुभाने लगे।।… Read More

कविता : मोहब्बत ने सीखा दिया

मेरी मोहब्बत ने मुझे, लिखना सीखा दिया। लोगो के मन को, पढ़ना सीखा दिया। बहुत कम होंगे जो मुझे,  पढ़ने की कोशिस करते होंगे। वरना जमाने वालो ने तो, मरने को छोड़ दिया था। न धोका हमने खाया है, न… Read More

प्रेमगीत : है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !

है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन ! वो पल वो क्षण हमारे नयनों का मिलन जब था मूक मेरा जीवन तब हुआ था तेरा आगमन कलियों में हुआ प्रस्फुटन भंवरों ने किया गुंजन है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !… Read More

कविता : टिक-टिक-टिक

घड़ी की सुई,                            टिक-टिक-टिक। हृदय की गति, धक-धक। वक़्त की चाल, है रफ़्तार। पानी की बूंदें, टप-टप-टप। साँसों का चलना, अंदर-बाहर, ऊपर-नीचे। कुछ कारवां आगे, कुछ लम्हें पीछे। पलकें झपके, ऊपर-नीचे। सब चंचल गतिमान, वजनी द्रव्यमान। हर जगह शोर, स्पष्ट… Read More