+880
नासूर का तु कब तक यूं हीं शिकार होगा नासूर को भी इक दिन तुमसे ही प्यार होगा तुम पे न हक़ ज़तायें कहती हो ग़र मिरी जां तो ख्वाब में ही कम से कम इख़्तियार होगा दिखती ही वो… Read More
किस तरह शब-ओ-सुबह कह दूं तुम्हें तुम सिर्फ़ मेरी तुम दो तो कोई वजह कह दूं तुम्हे तुम सिर्फ मेरी ग़म – ए – गेसू की ये तह कह दूं तुम्हे तुम सिर्फ़ मेरी तुम ख़ुदा हो किस तरह कह… Read More
क्यों एक पल भी तुम बिन रहा नहीं जाता। तुम्हारा एक दर्द भी मुझसे सहा नहीं जाता। क्यों इतना प्यार दिया तुमने मुझ को। की तुम बिन अब जिया नहीं जाता।। तुम्हारी याद आना भी कमाल होता है। कभी आकर… Read More
इस अस्त व्यस्त से, भरे माहौल में। पत्नी बच्चे आशा, लागाये बैठी है। की कब आओगे, अपने घर अब तुम। अब तो आंखे भी, थक गई है। तुम्हारे आने का, इंतजार करते करते।। महीनों बीत गए है, तुम्हें देखे बिना। बच्चे… Read More
मेरे दिल में अंकुरित हो तुम। दिल की डालियों पर खिलते हो। और गुलाब की पंखड़ियों की तरह खुलते हो तुम। कोई दूसरा छू न ले तुम्हें इसलिए कांटो के बीच रहते हो तुम। फिरभी प्यार का भंवरा कांटों के… Read More