umeed hai

कविता : नस नस में है

रात ढलने को है सपनो से निकलना है। दिन के उजाले में खुदको खोजना है। फिर अपनी राह पर हमें चलना है। और अपनी मंजिल को हमें पाना है।। लूटाकर सब कुछ हमने क्या पाया है। जीवन के लक्ष्य से… Read More

maharana pratap

कविता : मुख्यधारा में स्वागत तुम्हारा

संस्कारों के, पालक महान तुम , संस्कृति तुमने ना छोड़ी । ली जो प्रतिज्ञा मेवाड़ इतिहास में, अब तक ना तुमने तोड़ी । बुरे समय में प्रण कर धारण, राणा के जो सहचर थे । पल-पल जिन ने साथ निभाया,… Read More

gandhi ji

कविता : बापू तेरे सपनों का भारत

बापू तेरे सपनों का भारत , आज बड़ी मुश्किल में हैं । सत्य अंहिंसा तुझको पाने , ढूंढे हर महफ़िल में है । बापू तेरे सपनों का भारत , आज बड़ी मुश्किल में हैं । सच है बोझिल ,सच है… Read More

gurunanak ji

कविता : गुरुनानक जी

कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन तलवंडी, पंजाब (पाकिस्तान) में जन्मा एक बालक, मातु पिता ने नाम दिया था उसको नानक। आगे चलकर ये ही नानक सिख धर्म प्रवर्तक… Read More

deep jalayein

कविता : एक दीप जलाएँ, उनके नाम

लड़ियाँ दीपों की, जले चारों ओर, आज हुई जगमग, रोशन दिवाली। चहुँओर चेहरों पर जलते दीपों सी जगमग, चहुँओर ओर देखो खुशचेहरों की खुशहाली। मावस रात भी, लगे पूनम चमकती काली है फिर भी, लगे भरपूर उजियाली। पर जिनसे यहाँ… Read More

durgama

कविता : पूजो मातारानी को

करे जो पूजा और भक्ति नवरात्रि के दिनों में। और करते है माता की साधना और उपासना। तो मिलता है उन्हें सूकून अपने जीवन में। और हो जाती पूरी उनकी इच्छाएं इन दिनों में।। माता के नौ रूपों को जो… Read More

navratriprav

कविता : माँ के रूप अनेक

मन मंदिर में आन विराजो मेंहर वाली मातारानी। दर्शन की अभिलाषा लेकर आ गये हम मेंहर में। तुमको अपने दर्शन देने बुला लो हमें मंदिर में। हम तो तेरे बच्चे है काहे घूमा रही हो दुनिया में।। कितने वर्षो से… Read More

uljhany

कविता : अपनी उलझने

न मन पढ़ने में लगता है न दिल लिखने को कहता है। मगर विचारो में सदा ये उलझा सा रहता है। करू तो क्या करू अब मैं समझ में कुछ नहीं आ रहा। इसलिए तो हमारा दिल अब एकाकी सा… Read More

kalm

कविता : क्यों करता हूँ कागज काले..??

क्यों करता हूं कागज काले …?? बैठा एक दिन सोच कर यूं ही , शब्दों को बस पकड़े और उछाले । आसमान यह कितना विस्तृत ..? क्या इस पर लिख पाऊंगा ? जर्रा हूं मैं इस माटी का, माटी में… Read More

narisakti

कविता : नारी को जाने और समझे

दिखाये आँखें वो हमें जब मनका काम न हो उसका। तब बहाना ढूँढती रही हमें शर्मीदा करने का। यदि इस दौरान कुछ उससे पूछ लिया तुमने। तो समझ लो तुम्हारी अब खैर नहीं है।। अलग अलग तरह के रूप देखने… Read More