wridhaawstha

विकासशील देशों की
तर्ज पर
कभी उम्र का
विस्तार नहीं होता
इसके चलते बुजुर्गो का
सम्मान नहीं होता।।

प्रशिक्षित चिकित्सा ही
विकल्प नहीं
स्वास्थ के लिए जागरूकता का
अभियान भी होगा
अब तो अपनी जीवनशैली को
बदलना होगा
आगे आकर बढ़ना होगा।।

अनुभवों की खदान है
बुजुर्ग
वह खुद ही राह दिखा देंगे
हमे तो बस उनका
सहारा बनना होगा
बदलते परिवेश के साथ
हमे भी;
अब आगे बढ़ना होगा….।।

कोरोना से बचाव के लिए
अपने बुजुर्गो को
घर पर ही रखना होगा
अब यह निर्णय लेना होगा
बुजुर्गो के सम्मान के लिए
लड़ना होगा……।।

हम तो नन्हें पौधे हैं
वटवृक्ष की छाया में ही
हमें आगे बढ़ना होगा
उनके अनुभवों की छाया में ही
खुद को सहजना होगा
घर को ही मंदिर बनाना होगा।।

One thought on “कविता : बदलता परिवेश”

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