हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के तत्त्वावधान में प्रख्यात आलोचक प्रो. नामवर सिंह की जन्मशती के अवसर पर नामवर सिंह : आलोचना और वैचारिकता शीर्षक से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 26-28 फरवरी, 2026 को किया जा रहा है। इस संगोष्ठी में देश-विदेश से अतिथि और प्रतिभागी सम्मिलित होंगे। इस संगोष्ठी के आयोजन सचिव हिन्दी विभाग के प्रो. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि संगोष्ठी का उद्घाटन 26 फरवरी, 2026 को प्रख्यात कथाकार काशीनाथ सिंह की अध्यक्षता में होगा। उद्घाटन वक्तव्य साहित्य अकादमी सम्मान से विभूषित कवि अरुण कमल देंगे। बीज वक्तव्य प्रतिष्ठित कथाकार तथा ‘तद्भव’ के सम्पादक अखिलेश देंगें। इस सत्र में बतौर मुख्य अतिथि प्रसिद्ध समाज विज्ञानी प्रो. आनन्द कुमार और विशिष्ट अतिथि डॉ. दिव्या माथुर रहेंगी।

संगोष्ठी के वैचारिक सत्रों के मुख्य विषय ‘अपभ्रंश की आधुनिकता’, ‘साहित्य चिंतन से संवाद’, ‘आधुनिकता, इतिहास और उपन्यास’, ‘हिन्दी आलोचना का मूल्यांकन’, ‘समकालीन विश्व और भारतीय समाज’, ‘विश्व साहित्य और नामवर सिंह’, ‘भक्ति काव्य, कबीर और नवजागरण’ होंगे। संगोष्ठी के इन विभिन्न सत्रों में श्री उज्ज्वल भट्टाचार्य, प्रो. अवधेश प्रधान, प्रो. सदानंद शाही, प्रो.बिंदा परांजपे, प्रो. राजकुमार, प्रो. कृष्ण मोहन, प्रो. बजरंग बिहारी तिवारी, प्रो. विनोद तिवारी, प्रो. बसन्त त्रिपाठी, प्रो. अनिल त्रिपाठी, प्रो. कंचन झा, प्रो. विवेक निराला, प्रो. श्वेता दीप्ति, डॉ. पल्लव, डॉ. वैभव सिंह, श्री राकेश बिहारी आदि अपना विशिष्ट वक्तव्य देंगे। संगोष्ठी के सभी सत्र प्रेमचन्द सभागार, कला संकाय में होगी।
प्रो. नामवर सिंह हिन्दी साहित्य के आधुनिककाल के विख्यात प्रगतिशील आलोचक रहे हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग से नामवर जी का सम्बन्ध शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही रूपों में था। एक तरह से बीएचयू नामवर सिंह की उच्च शिक्षा की भूमि रही है। हिन्दी की आलोचना के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण और उल्लेखनीय है। जेएनयू में भारतीय भाषा केंद्र की स्थापना में भी उनकी प्रमुख भूमिका रही है। नामवर सिंह की जन्म शताब्दी पर उनके प्रति साहित्यिक कृतज्ञता ज्ञापित करने हेतु यह आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी का समापन सत्र 28 फरवरी 2026 को संपन्न होगा। समापन सत्र की अध्यक्षता हिन्दी के प्रसिद्ध ग़ज़लकार प्रो. वशिष्ठ अनूप द्विवेदी करेंगे। समाहार वक्तव्य प्रतिष्ठित आलोचक प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल देंगे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रो. सिद्धार्थ सिंह होंगे।
