दिल्ली विश्वविद्यालय स्थित जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में आज “भारत को जानो” समारोह का आयोजन कॉलेज प्राचार्य माननीय प्रो. स्वाति पाल के श्रेष्ठ निर्देशन में भव्यतापूर्वक संपन्न हुआ। यह समारोह प्रवासी भारतीय अनुसंधान एवं संसाधन केंद्र (विदेश मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समर्थित) सहित महाविद्यालय की भारतीय भाषा समिति के परस्पर सहयोग से आयोजित किया गया। इस उत्सव का आधार भारत के सांस्कृतिक वैभव को स्मरण करने के साथ-साथ वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होना भी रहा। इस समारोह का शुभारंभ प्रवासी आगंतुकों को तिलक सहित भारतीय संस्कृति में आतिथ्य के प्रतीक दुशाला भेंट कर किया गया। इस दौरान कार्यक्रम के प्रमुख आमंत्रित अतिथि के बतौर अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के अध्यक्ष, राजदूत विनोद कुमार, श्री श्याम परांडे, श्री नारायण कुमार, प्रो. गोपाल अरोड़ा सहित मेजबान कॉलेज से माननीय प्राचार्य, प्रो.स्वाति पाल, उप प्राचार्य एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो.संध्या गर्ग, निर्देशक सी.आई.एन.पी, प्रो.वी.राज्यलक्ष्मी, आईक्यूएसी समन्वयक, डॉ. कुश कुमार गयासेन, उप-आईक्यूएसी समन्वयक, डॉ.शिवानी बर्णवाल उपस्थित रहे। सांस्कृतिक रूप से कार्यक्रम का आरंभ  दीप प्रज्ज्वलन सहित महाविद्यालय प्रार्थना एवं विश्वविद्यालय कुलगीत से किया गया।

इसके पश्चात माननीय प्राचार्य  के औपचारिक आरंभिक संबोधन में अखिल भारतीय सांस्कृतिक झाँकी के दर्शन हुए। माननीय प्राचार्य ने वंदे मातरम के 150 वर्ष की पूर्णता पर भारतीय गौरवशाली इतिहास को स्मरण करते हुए भारत को ‘विश्व की पुरातन जागृत संस्कृति’ कहा। इस दौरान उन्होंने स्वामी विवेकानंद को भी दृष्टान्त स्वरूप याद किया और कहा कि उनके अनुसार-“भारत की विविधता ही उसकी शक्ति है, और इसी विविधता में एकता की भावना ही राष्ट्र निर्माण का आधार है, जिसमें सभी धर्मों और भाषाओं का सम्मान निहित है, जो भारत को विश्व के लिए एक उदाहरण बनाता है।” प्राचार्य ने युवा प्रवासी आगंतुकों को संबोधित करते हुए उन्हें स्वामी विवेकानंद के “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए! “वाक्य का मर्म भी समझाया। प्राचार्य ने राष्ट्र की संकल्पना को स्मरण करते हुए रवींद्रनाथ टैगोर के विज़न को याद किया । जिसमें उन्होंने कहा था-
“जहाँ मन भयमुक्त हो और सिर ऊंचा रहे,
जहाँ ज्ञान स्वतंत्र हो, जहां दुनिया संकीर्ण घरेलू दीवारों से
टुकड़ों में न बंटी हो,….
हे मेरे पिता, मेरे देश को स्वतंत्रता के उस स्वर्ग में जागृत करो।”
अपने संबोधन के अंत में माननीय प्राचार्य द्वारा यशश्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के वर्ष 2025 के अभिभाषण को उद्धृत  करते हुए कहा गया-
“भारत आज रुकने के मूड में नहीं है! हम न रुकेंगे, न ही धीमे होंगे, 140 करोड़ भारतीय पूरी गति से एक साथ आगे बढ़ेंगे।” उन्होंने अपने संदेश में कहा कि –‘प्रश्न कीजिये, जिज्ञासा से घूमिये और दूसरों का सम्मान कीजिए। यही हमारी वास्तविक पहचान भी है।’ समारोह में कॉलेज  के संस्थापक आदरणीय ब्रज कृष्ण चाँदीवाला के त्याग समर्पण और  सत्यनिष्ठा को याद करते हुए राष्ट्रपिता गांधी से उनकी मित्रता एवं समाज के वंचित तबके से आने वाली मेधावी छात्र बालिकाओं के लिए महाविद्यालय की स्थापना का ध्येय स्मरण किया गया।

प्राचार्य के संबोधन के बाद राजदूत विनोद कुमार  जी ने भारत के प्रशासनिक महत्व एवं साम्प्रदायिक सद्भाव पर आलोक डालते हुए युवाओं को प्रेरित किया और कहा कि –“भारत के युवा, भारत का भविष्य हैं और भविष्य मेधावी युवाओं का ही है।” इसके उपरांत महाविद्यालय की यूफिनि, नूपुर, नृत्या, झंकार सांस्कृतिक महाविद्यालय छात्र समितियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गई और उसके पश्चात प्रवासी आगंतुकों को माननीय प्राचार्य द्वारा कॉलेज परिसर का दौरा कराया गया। आयोजन के दौरान दुनियाँ के 20 (दक्षिण अफ्रीका, गुयाना, मलेशिया, सूरीनाम, मॉरीशस, म्यांमार, फिज़ी, यू.एस.ए, कनाडा, पनामा, मलाविया, श्रीलंका, सिंगापुर, फ़्राँस, यू.के., स्विट्ज़रलैंड, नीदरलैंड्स, इज़राइल इत्यादि) देशों से आए प्रवासी भारतीयों के मध्य प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें प्रवासी आगंतुकों ने हर्ष सहित सहभागिता दर्ज कराई। इसके साथ ही उपस्थित आगंतुकों के मध्य चर्चा-परिचर्चा का दौर चला। यह बेहद प्रभावी रहा।इसके उपरांत फिज़ी, गुयाना, त्रिनिडाड, सूरीनाम, दक्षिण अफ्रीका एवं श्रीलंका से उपस्थित विशिष्ट राजदूतों के सम्मान, अभिभाषण एवं प्रवासी आगंतुकों को सम्मान प्रतीक प्रदान कर समारोह का औपचारिक समापन पूर्ण हुआ।

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