उदय प्रताप कॉलेज के राजर्षि सभागार में आज राजर्षि उदय प्रताप सिंह जू देव की 176वीं जयंती भव्य समारोह के साथ मनाई गई। आज के समारोह के मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी थे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वाधीनता संघर्ष के दौरान पूरे देश में महात्मा गांधी, पं. मदन मोहन मालवीय जैसे जिन मनीषियों ने शिक्षा, ज्ञान और स्वाधीनता की ज्योति जलाई थी उनमें राजर्षि उदय प्रताप सिंह जू देव का नाम विशेष आदर लिया जाता है। राजर्षि द्वारा स्थापित उदय प्रताप कॉलेज की विरासत लगभग 125 वर्षों की है जिसमें इसने शिक्षा के क्षेत्र में विशेष ख्याति अर्जित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि राजर्षि एक भविष्य दृष्टा थे। खुशी की बात है कि उनके सपनों को पूरा करने में आज इस कॉलेज के प्राचीन छात्र, प्रबंध समिति और संपूर्ण कॉलेज प्रशासन लगा हुआ है। इतना होते हुए भी इस कॉलेज के समक्ष एक बड़ी चुनौती इसकी महान विरासत की शाश्वतता को सुनिश्चित करना है। यही राजर्षि के प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
आज के समारोह की अध्यक्षता उदय प्रताप शिक्षा समिति के सचिव तथा मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज के पूर्व प्राचार्य प्रो. यू.एस. सिन्हा ने किया। प्रो. सिन्हा इस कॉलेज के प्राचीन छात्र भी थे। उन्होंने इस कॉलेज के अपने संस्मरणों को याद करते हुए कहा कि यह कॉलेज मेरी माँ की तरह है। मैंने इस कॉलेज से शक्ति और संघर्ष करने की क्षमता अर्जित की है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मेडिकल की पढ़ाई करते समय हम अपने साथियों के साथ गर्व से कहते थे- ‘आई. एम. क्षत्रिय’। प्रो. सिन्हा ने इस कॉलेज के विकास के लिए घोषणा किया कि साल भर के भीतर 500 व्यक्तियों की क्षमता वाला एक ऑडिटोरियम बनाया जाएगा, एक दुर्घटना फंड तैयार किया जाएगा तथा कॉलेज के विकास के लिए प्राचीन छात्रों की एक समिति बनाई जाएगी।

आज के समारोह में उदय प्रताप शिक्षा समिति के कैंपस कोऑर्डिनेटर तथा काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि की वर्तमान का ठीक-ठाक मूल्यांकन करके ही हम राजर्षि के मूल्यों की रक्षा और विकास कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस कॉलेज के विकास में प्राचीन छात्रों का अमूल्य योगदान रहा है और वर्तमान समय में भी हमारे छात्र नेताओं की सकारात्मक भूमिका है। इनके सहयोग से कुछ ही वर्षों में कॉलेज के मूलभूत ढांचे में हम बड़ा बदलाव करेंगे।
समारोह की आरंभ में आए हुए अतिथियों का स्वागत उदय प्रताप कॉलेज के प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने किया। उन्होंने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि पूज्य राजर्षि उदय प्रताप सिंह जू देव का लक्ष्य परंपरा और आधुनिकता में समन्वय स्थापित करना था। उन्होंने राजर्षि के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि आज इस संस्था की सभी इकाईयां उनके सपनों को साकार करने में लगी हुई हैं। उदय प्रताप महाविद्यालय पिछले 6 माह से पूरे प्रदेश में प्रमाण पोर्टल पर प्रथम स्थान प्राप्त कर रहा है, लगभग 25 विद्यार्थियों ने नेट पास किया है और 250 विद्यार्थी शोध कार्य में लगे हुए हैं।
समारोह के आरंभ में सरस्वती वंदना उदय प्रताप पब्लिक स्कूल की छात्राओं द्वारा तथा कुल गीत एवं स्वागत गीत रानी मुरार कुमारी बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस समारोह में कालेज की छात्र-छात्राओं के रूप में कुमारी वैभवी सिंह, प्रिंसी पांडेय, अनुभव यादव, यशस्वी दुबे और स्वास्तिक त्रिपाठी ने राजर्षि के प्रति अपनी भावांजलि अर्पित किया। प्राचीन छात्र के रूप में श्री अरविंद सिंह ने राजर्षि के व्यक्तित्व एवं कार्यो पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि हमारे ऊपर राजर्षि का बहुत बड़ा ऋण है। इसलिए उदय प्रताप कॉलेज के विकास में प्राचीन छात्रों का पूरा सहयोग रहेगा। समारोह में आए हुए अतिथियों का डॉ. रमेश प्रताप सिंह ने आभार प्रकट किया तथा संचालन श्री शरद श्रीवास्तव ने किया।
आयोजन के अंत में उदय प्रताप पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने ‘अरे रामा भादों रैन अंधियारी’ चैती गीत तथा उदय प्रताप डिग्री कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने ‘शीतली बयरिया शीतल दूजे पनिया कब देबा देवता आके दर्शनिया’ छठ गीत प्रस्तुत किया। राजर्षि जयंती समारोह के इस अवसर पर रानी मुरार कुमारी बालिका इंटर कॉलेज के नवनिर्मित भवन तथा उदय प्रताप कॉलेज के महिला छात्रावास के ब्लॉक-बी का लोकार्पण उदय प्रताप शिक्षा समिति के सचिव प्रो. यूं. एस. सिन्हा के करकमलों द्वारा किया गया। साथ ही उदय प्रताप इंटर कॉलेज के इंटरमीडिएट भवन के जीर्णोद्धार का कार्य भी पूर्ण हुआ।
आज के समारोह में जिन महानुभावों की विशेष उपस्थिति रही उनमें डॉ. चेतनारायण सिंह, डॉ. मूलचंद सिंह, प्रो. एस.के. सिंह, डॉ. दुर्ग विजय सिंह, श्री चारुचंद्र राम त्रिपाठी, श्री रामललित सिंह, डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह, प्रो. मनीष कुमार सिंह, श्री अखिलेश प्रताप सिंह, डॉ. राम सुधार सिंह, प्रो. चंद्र प्रकाश सिंह, प्रो. एन.पी. सिंह, प्रो. सुधीर कुमार राय, प्रो. सुधीर कुमार शाही, प्रो. रमेश धर द्विवेदी, प्रो. शशिकांत द्विवेदी, प्रो. गोरखनाथ, डॉ. डी.डी. सिंह, प्रो. डी. के. सिंह, प्रो. अंजू सिंह, डॉ. अनीता सिंह, प्रो. अमन कुमार गुप्ता, श्रीमती संगीता कुमार, श्रीमती ज्ञान प्रभा सिंह, प्रो. पंकज कुमार सिंह, प्रो. अनिल सिंह, प्रो. मनोज प्रकाश त्रिपाठी, डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. आनंद राघव चौबे, प्रो. मधु सिंह, प्रो. तुमुल सिंह, प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह, श्री सौरभ कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में अध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
