उदय प्रताप कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा आज हिंदी दिवस के अवसर पर ‘हिंदी है पहचान हमारी’ विषय पर राजर्षि सेमिनार हॉल में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए जनकवि शिवकुमार ‘पराग’ ने कहा कि हिंदी एक लोक भाषा है और उसे ताकत लोक से ही मिलती है। लोक से जुड़कर ही आज वह अपनी वैश्विक पहचान बना रही है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के दौरान जिन राजनेताओं को देश की जनता को संबोधित करना होता था वे हिंदी को ही माध्यम बात करते थे। उस समय हिंदी के माखनलाल चतुर्वेदी, सुभद्रा कुमारी चौहान जैसे रचनाकारों ने ऐसी प्रेरणादाई कविताएँ लिखा जिन्होंने देश की जनता को झकझोर दिया।श्री शिवकुमार पराग ने इस अवसर पर अपनी विशिष्ट कविता “तिनका तिनका जोड़कर लाती रही ज़िन्दगी” …. सुनाई।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डॉ. सदानंद सिंह ने कहा कि हिंदी जोड़ने वाली भाषा है। यह कार्य उसने राष्ट्रीय आंदोलन में तो किया ही था, आज भी यह कार्य कर रही है। इसीलिए वह वैश्विक स्तर पर लगातार विकसित होती जाने वाली भाषा है। आज दुनिया में लगभग 61 करोड़ लोग हिंदी भाषा का व्यवहार करते हैं । इसमें से 90 प्रतिशत जनता हिंदुस्तान में रहती है। आज की संगोष्ठी में हिंदी के वरिष्ठ कवि डॉक्टर अशोक कुमार सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने छात्र-छात्राओं को संबोधित करने के साथ ही ‘शहर इतना शहर इतना शहर हो जाएगा, आदमी का आदमी रहना समर हो जाएगा’ तथा ‘अंधों के शहर में आईना बेचता हूँ’ कविताएं प्रस्तुत किया जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा।
समारोह के आरंभ में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने किया। उन्होंने अपने स्वागत वक्तव्य कहा कि भारतीय संविधान सभा में सर्वाधिक बहस भाषा को लेकर ही हुई थी। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का साठ के दशक में गैर हिंदी भाषी प्रांतों ने विरोध किया था लेकिन आज हिंदी केवल कानून की भाषा के बल पर आगे नहीं बढ़ रही है बल्कि उसे विस्तार देने का कार्य विशाल हिंदी जनता कर रही है। इसीलिए आज हिंदी जहाँ एक ओर फिल्मों की भाषा, साहित्य लेखन की भाषा और ज्ञान विज्ञान की भाषा है वहीं अपनी नई पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से भी कर रही है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि उसकी नई पहचान जेन जी की भाषा के रूप में भी है। उन्होंने हिंदी के विकास में वाराणसी और उदय प्रताप कॉलेज की चर्चा करते हुए कहा कि उदय प्रताप कॉलेज हिंदी की सुगंध है।

आज के इस आयोजन में छात्र-छात्राओं की ओर से आँचल प्रजापति, सुधांशु दुबे, श्रेया जायसवाल तथा पिंकी उपाध्याय ने अपनी बात रखी। संगोष्ठी का संचालन प्रो. गोरखनाथ ने किया तथा प्रो. मधु सिंह आभार प्रकट किया। आज की संगोष्ठी में जिनकी विशिष्ट उपस्थिति रही उनमें प्रो. रमेशधर द्विवेदी, प्रो. पंकज कुमार सिंह, प्रो. सुधीर कुमार राय, प्रो. शशिकांत द्विवेदी, प्रो. संजीव कुमार, प्रो. तुषारकांत श्रीवास्तव , डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. अनूप कुमार सिंह, डॉ.अशोक कुमार सिंह, डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. शशिकांत सिंह, डॉ. जितेन्द्र सिंह, डॉ. कृष्ण कुमार भारती, डॉ. संजय स्वर्णकार, डॉ. देवेशचंद्र, डॉ. विजय कुमार सिंह, डॉ. चंद्रशेखर सिंह, डॉ. वंश गोपाल यादव, डॉ. अतुल कुमार पाण्डेय, डॉ. विनोद पाल, डॉ. लालेंद्र सिंह, डॉ. नवीन कुमार यादव, डॉ. सत्य शरण मिश्रा, डॉ. नीलेश सिंह, डॉ. चंदन कुमार सिंह, डॉ. विनय कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
