आज जिला पुस्तकालय अर्दली बाजार, वाराणसी के सभागार में पचहत्तर के डॉक्टर गया सिंह अभिनंदन समारोह का आयोजन साहित्य सर्जन मंच, वाराणसी के द्वारा किया गया। डॉ. गया सिंह काशी के साहित्य, समाज और संस्कृति से जुड़े हुए एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर माने जाते हैं। उनके 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस अभिनंदन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रो. दीपक मलिक ने कहा कि डॉ. गया सिंह ऑर्गेनिक इंटेलेक्चुअल के रूप में हमें दिखाई देते हैं। उन्होंने डॉ. गया सिंह के व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए कहा कि आम आदमी के साथ जुड़ाव इनकी मुख्य विशेषता है। यही नहीं सही के पक्ष में सदैव खड़े रहना इनका स्वभाव है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुरेंद्र प्रताप ने कहा कि डॉ. गया सिंह बनारस की एक बड़ी उपलब्धि हैं। इनके व्यक्तित्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता किसी भी परिस्थिति में स्वाभिमान के साथ समझौता न करने की है। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रो. सदानंद शाही ने कहा कि हिंदी साहित्य के पाठ्यक्रम में बाबा कीनाराम को शामिल करना डॉक्टर गया सिंह का मुख्य योगदान है। वह पूर्वांचल के महाबली हैं।

समारोह के आरंभ में कथाकार काशीनाथ सिंह ने द्वारा भेजे गए शुभकामना संदेश का वाचन प्रो. गोरखनाथ ने किया। काशीनाथ सिंह ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि डॉ. गया सिंह एक अजेय योद्धा की तरह सदैव जरूरतमंद व्यक्ति के साथ खड़े रहने वाले व्यक्ति रहे हैं और ये आगे भी अपनी यह भूमिका निभाते रहेंगे। आज के इस अभिनंदन समारोह में डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि डॉक्टर गया सिंह का लेखन इस बात को प्रमाणित करता है कि कबीर, गोरखनाथ और कीनाराम चेतना के एक ही धरातल पर स्थित रहे हैं। डॉ. वाचस्पति ने अपने संस्मरणों को याद करते हुए डॉक्टर गया सिंह को एक साधक बताया। आज के इस अभिनंदन समारोह में प्रो. देव व्रत चौबे, प्रो. प्रकाश उदय, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. नीलम सिंह तथा प्रो. रिचा सिंह ने भी शुभकामनाएं दीं।

डॉ. गया सिंह ने अपने शुभकामना समारोह में बोलते हुए कहा कि साहित्यकारों को गुटबाजी छोड़कर के एक मंच पर खड़े होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आदमी को आदमी बनने के लिए प्रयास करना चाहिए क्योंकि आज मानवीय संवेदना का क्षरण तेजी से हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें सम्मान के साथ रहने के लिए बहुत अधिक पैसों की जरूर न होकर मानवीय संवेदना की जरूरत होती है।
आज के इस अभिनंदन समारोह का संचालन श्री अशोक आनंद ने, स्वागत प्रो. गोरखनाथ ने तथा आभार डॉ. संजय श्रीवास्तव ने प्रकट किया। इस अवसर पर डॉ. संजय सिंह, डॉ. पंकज श्रीवास्तव, विनय कृष्ण, अजीत यादव, रवि कुमार यादव, प्रीति कुमारी सहित बड़ी संख्या में छात्राएँ एवं नागरिक समाज के लोग मौजूद रहे।

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