संस्मरण : अरे बाप रे!

अरे बाप रे, आप तो कंचे खेलते हैं “क्यूं कंचे खेलना ग़लत है..? मैं तो ताश भी खेलता हूँ तब तो ताश खेलना पाप हो जाएगा हैना..?” क्या..? ताश भी खेलते हैं, कल का जुआ भी खेलेंगे हुंह! “तो क्या … Continue reading संस्मरण : अरे बाप रे!