संस्मरण : आशा ताई

“सुनिए ‘आशा ताई’,” हां? अरे सुनिए तो, कहिए तो.. “आप सुनती ही कहा हैं. कब से आशा ताई आशा ताई कर रहें हैं.” “अरे कबसे सुन ही तो रही हूं. वैसे आज आप बड़ी तारीफ़ कर रहे हैं. आशा ताई…” … Continue reading संस्मरण : आशा ताई