कविता : मोड़ा हुआ ‘किताब’ का पन्ना

कई महीनों से बल्कि साल के बराबर वैसे देखा जाए तो हमेशा से.. रैक में पड़ी किताबे जद्दोजहद करने के बाद भी, सड़को पर निकलकर सांस्कृतिक सामाजिक राजकीय विद्रोह कर पाने में नाकामयाब रही हैं। शायद, यह पूरी तरह सच … Continue reading कविता : मोड़ा हुआ ‘किताब’ का पन्ना