हिंदी सिनेमा और साहित्य में संवेदना का संकट

“अब जब तुम देखोगे चेहरा अपना पहचान जैसा सब कुछ, कुछ नहीं होगा कहीं भी, बदली-बदली है विश्व संरचना इन दिनों” बदलती हुई इस विश्व संरचना के दौर में जहाँ दुनियाँ तेजी से बदल रही है। वहीं उसके भीतर की … Continue reading हिंदी सिनेमा और साहित्य में संवेदना का संकट