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प्रवेशांक : 1 नवंबर-7 नवंबर 2021

साहित्य सिनेमा सेतु
(साहित्य, शिक्षा, सिनेमा, समाज, कला एवं संस्कृति को समर्पित साप्ताहिक ई-पत्रिका)

संपादक सदस्य

परामर्शदाता
डॉ. पुनीत विसारिया
संपादक
आशुतोष श्रीवास्तव
उप संपादक
अंकिता श्रीवास्तव
सह संपादक
रितु गुप्ता, अनुज गौतम
संपादक मंडल
साधना अग्निहोत्री, अश्वनी गुप्ता,
रोहित श्रीवास्तव
तकनीक विशेषज्ञ
अरुण यादव
विधि विशेषज्ञ
बृजेश तिवारी, आदित्य कुमार
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संपर्क : निकट कन्हैया नगर मेट्रो, दिल्ली-34
ईमेल : sahityacinemasetu@gmail.com
वेबसाइट : www.sahityacinemasetu.com
मो. 9899860999 (वाट्सएप)
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स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक और संपादक ‘आशुतोष श्रीवास्तव’ द्वारा निकट परशुराम चौक, सी.सी.रोड देवरिया (उ.प्र.), पिन- 274001 से प्रकाशित। वेबपोर्टल एवं ई-पत्रिका में प्रकाशित लेखों/रचनाओं में व्यक्त विचार लेखकों के हैं। इससे संपादकीय विचारों का सहमत होना आवश्यक नहीं है। वेबपोर्टल एवं ई-पत्रिका पूर्णरूप से अव्यवसायिक है और इसके सभी पद अवैतनिक हैं। साथ ही पत्रिका की सदस्यता पूरी तरह से नि:शुल्क है। पत्रिका का न्यायिक क्षेत्र दिल्ली है। लेख/रचनाओं से संबंधित चित्र/वीडियो इन्टरनेट/गूगल/यूट्यूब आदि से साभार हैं।
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इस अंक में…

संपादकीय

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संपादकीय

साहित्य और सिनेमा ऐसे माध्यम हैं जिसमें समाज को बदलने की ताकत सबसे अधिक होती है। कहना गलत न होगा कि सिनेमा, साहित्य से अधिक प्रभावशाली और आम जनता तक सरलता से पहुँचने वाला माध्यम है। साहित्य, सिनेमा में रूपांतरित होकर उन लोगों से भी संवाद करता है जहाँ साहित्य का मर्म ही नहीं पहुँच पाता। साहित्य के चिंतक, लेखकों, और आलोचक सिनेमा को साहित्य का हिस्सा मानने से हमेशा हिचकते रहें हैं, यह जानते हुए भी कि सिनेमा का आरंभ ही साहित्य से होता है। एक तरह से देखें तो समाज, साहित्य और सिनेमा के बीच की धुरी है। एक तरफ समाज इनसे प्रभावित होता है तो दूसरी ओर समाज से प्रभावित होकर ही साहित्य और सिनेमा का जन्म होता है। साहित्य और सिनेमा कहीं न कहीं हमेशा ही एक दूसरे के विस्तार में सहयोग करते रहें हैं। कहना सर्वथा उचित ही होगा कि साहित्य और सिनेमा एक दूसरे के पूरक हैं।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए “साहित्य सिनेमा सेतु” नाम से साप्ताहिक ई-पत्रिका की शुरुआत की गई। जो साहित्य, शिक्षा, सिनेमा, समाज और कला एवं संस्कृति के विकास को भी समर्पित है। इनसे जुड़े सभी बिंदुओं के साथ समसामयिक विषयों को भी पत्रिका में स्थान दिया जाएगा। इस सोच को और मजबूती मिल सके तथा इसको साकार करने हेतु देश-विदेश के समस्त साहित्य और सिनेमा से जुड़े छात्रों, शोधार्थियों, विद्वानो, लेखकों, प्राध्यापकों एवं चिंतको को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। दीपावली के शुभ अवसर पर पत्रिका का प्रथम अंक आप सभी के समक्ष उपस्थित है। जिसमें कहानी, कविता, संस्मरण, नशे जैसे समसामयिक विषयों पर लेख हैं। आशा है आप सभी हमसे जुड़कर हमारे इस पहल को सफल बनाने में हमारा साथ देकर हमारा मनोबल अवश्य बढ़ायेंगे।
आपसे अपेक्षित सहयोग की आशा में…

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• लेख : ज्ञानी और मोक्ष

लेख : ज्ञानी और मोक्ष


• कविता : एक दीप जलाएँ, उनके नाम

कविता : एक दीप जलाएँ, उनके नाम


• लघुकथा : रावण का फोन

लघुकथा : रावण का फोन


• कविता : गंवारा न था

कविता : गंवारा न था


• लघुकथा : रावण में भी राम

लघुकथा : रावण में भी राम


• संस्मरण : आशा ताई

संस्मरण : आशा ताई


• समसामयिक : नशे की पहली ख़ुराक, इलायची की आड़ में गुटखे का विज्ञापन

नशे की पहली ख़ुराक : इलायची की आड़ में गुटखे का विज्ञापन

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