sahitya cinema setu

साहित्य और सिनेमा ऐसे माध्यम हैं जिसमें समाज को बदलने की ताकत सबसे अधिक होती है । कहना गलत न होगा कि सिनेमा, साहित्य से अधिक प्रभावशाली और आम जनता तक सरलता से पहुँचने वाला माध्यम है। साहित्य, सिनेमा में रूपांतरित होकर उन लोगों से भी संवाद करता है जहाँ साहित्य का मर्म ही नहीं पहुँच पाता । साहित्य के चिंतक, लेखकों, और आलोचक सिनेमा को साहित्य का हिस्सा मानने से हमेशा हिचकते रहें हैं, यह जानते हुए भी कि सिनेमा का आरंभ ही साहित्य से होता है । एक तरह से देखें तो समाज, साहित्य और सिनेमा के बीच की धुरी है । एक तरफ समाज इनसे प्रभावित होता है तो दूसरी ओर समाज से प्रभावित होकर ही साहित्य और सिनेमा का जन्म होता है । साहित्य और सिनेमा कहीं न कहीं हमेशा ही एक दूसरे के विस्तार में सहयोग करते रहें हैं । कहना सर्वथा उचित ही होगा कि साहित्य और सिनेमा एक दूसरे के पूरक हैं ।

इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए दिसंबर 2013 में हमने अपने मित्रों के साथ इस पर चर्चा करते हुए उनके सहयोग से “साहित्य सिनेमा सेतु” नाम से संस्था की नींव रखी। इसके लगभग दो वर्षों के पश्चात जब हमें कई जगहों से काफी प्रोत्साहन मिलना शुरू हुआ तो हमने वैधानिक रूप से इसे आगे बढ़ाने की योजना बनाई। जिसके तहत इसे “आशु प्रेमविमल” सेवार्थ न्यास द्वारा संचालित करने का फैसला किया गया। जिसे नवंबर 2015 में देवरिया (उ.प्र.) के रजिस्ट्री कार्यालय से पंजीकरण संख्या 106 द्वारा पंजीकृत किया गया।

हमारी संस्था साहित्य सिनेमा सेतु साहित्य और सिनेमा के साथ-साथ शिक्षा, कला एवं संस्कृति के विकास को भी समर्पित है । जिनसे समाज प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर पर हमेशा से ही प्रभावित होता रहा है । साहित्य सिनेमा सेतु एक ऐसा सांस्कृतिक मंच है, जिसके बैनर तले समय समय पर संगोष्ठियों, सभाओं, और प्रतियोगिताओं आदि का आयोजन किया जाता है । जिसमें हमारा उद्देश्य हिन्दी साहित्य के साथ साथ सिनेमा के क्षेत्र में हो रहे लेखन, शोध, फिल्म पत्रकारिता, एवं सिने साहित्य को लिखने वाले लेखकों आदि सबको बढ़ावा देना है । सिनेमा अब आज के समय में केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि आर्थिक मामलों में भी अपनी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका को निभा रहा है । जिसका प्रभाव हम समाज के शिक्षा, कला एवं संस्कृति आदि पर भी प्रचुरता के साथ देख सकते हैं। इसलिए इसकी भूमिका को देखते हुए इसे निकट भविष्य में अन्य विषय की भांति अधिक से अधिक विश्वविद्यालयों में इसकी पढाई शुरू की जाय एवं साथ ही हिन्दी सिनेमा का एक विश्वविद्यालय भी हमारे देश में स्थापित हो । इस सपने को और मजबूती मिल सके तथा इसको साकार करने हेतु देश-विदेश के समस्त साहित्य और सिनेमा से जुड़े छात्रों, शोधार्थियों, विद्वानो, लेखकों, प्राध्यापकों एवं चिंतको को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है । आशा है आप भी हमसे जुड़कर हमारे इस पहल को सफल बनाने में हमारा साथ देकर हमारा मनोबल अवश्य बढ़ायेंगे ।

संस्था का कार्यक्षेत्र एवं उद्देश्य

  • साहित्य और सिनेमा के साथ-साथ शिक्षा, कला एवं संस्कृति के विषय पर देश/विदेश के किसी भी महाविद्यालय/विश्वविद्यालय में पढ़/शोध कर रहे विद्यार्थियों/शोधार्थियों का सहयोग करना और सामग्री संकलन में उनकी मदद करना।
  • उपरोक्त सभी क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों की एक सूची बनाकर तैयार करना और उनके योगदान को सामने लाना।
  • प्रतिवर्ष देश के विभिन्न गांवो/शहरों में जाकर साहित्य, शिक्षा, सिनेमा, व कला एवं संस्कृति आदि सामाजिक उद्देश्यपरक विषयों पर फिल्मों/लघुफ़िल्मों/चित्रवृत्तों और डाक्यूमेंट्रीज का निर्माण एवं प्रदर्शन करना।
  • उपरोक्त विषयों के अपेक्षित विद्वानों/चिंतकों/साहित्यकारों/कलाकारों और फ़िल्मकारों के योगदान को दुनिया के सामने लाना।
  • समय-समय पर इन सभी विषयों पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों और चर्चा-परिचर्चाओं का आयोजन करना।
  • युवाओं को साहित्य, शिक्षा, रंगमंच, सिनेमा, व कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में एक मंच प्रदान करना।
  • साहित्य, शिक्षा, रंगमंच, सिनेमा व कला एवं संस्कृति में अपना विशेष योगदान करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करना।
  • देश व समाज के हित में क्रियान्वित कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना।

संस्था के सदस्य :-

  • संरक्षक – प्रेम प्रकाश लाल श्रीवास्तव, विमला श्रीवास्तव
  • परामर्शदाता – डॉ. सुधाकर मणि त्रिपाठी, प्रहलाद अग्रवाल
  • अध्यक्ष – डॉ. विवेक दुबे
  • उपाध्यक्ष – डॉ. पुनीत विसारिया
  • संस्थापक एवं सचिव – आशुतोष श्रीवास्तव
  • सहसचिव – अंकिता श्रीवास्तव, रितु गुप्ता
  • कोषाध्यक्ष – अनुज कुमार गौतम
  • सांस्कृतिक प्रभारी – साधना, सतीश सिंह, करन त्रिपाठी
  • तकनीकि विशेषज्ञ – अरुण यादव
  • विधि विशेषज्ञ – अशोक श्रीवास्तव, बृजेश तिवारी, आदित्य कुमार